सरकार के मुताबिक, प्रस्तावित नीति में पांच प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस रहेगा। इनमें पहला क्षेत्र सेमीकंडक्टर डिजाइन और बौद्धिक संपदा विकास है। दूसरा, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और इनोवेशन को बढ़ावा देना, तीसरा, विनिर्माण से जुड़ी गतिविधियां जैसे असेंबल, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग यानी एटीएमपी तथा ओएसएटी इकाइयों का विकास, चौथा, युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट और टैलेंट तैयार करना और पांचवां, स्टार्टअप और औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत बनाना होगा। दिल्ली में नौकरियों के अवसर
इस नीति का सबसे बड़ा फायदा रोजगार के क्षेत्र में होगा। सरकार का मानना है कि चिप डिजाइन, रिसर्च, एडवांस पैकेजिंग, टेस्टिंग और टेक सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नई नौकरियाें के दरवाजे खुलेंगे। इंजीनियरिंग, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, डाटा, मशीन डिजाइन और प्रबंधन से जुड़े युवाओं को खास फायदा मिल सकता है। इसके अलावा प्रशिक्षण कार्यक्रम, इंटर्नशिप और उद्योग-शैक्षणिक संस्थानों की साझेदारी के जरिए छात्रों को सीधे उद्योग से जोड़ा जाएगा।

