सेक्टर-110 महर्षि आश्रम के ट्रस्ट की 3.36 एकड़ जमीन बेचे जाने व अन्य प्रकरण में विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच शुरू हो गई है। एसआईटी प्रदेश के मुख्य सचिव की अगुवाई में बनी है। जांच में एसआईटी ने लखनऊ बुलाकर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से कई बिदुओं पर जानकारी ली है। इसके साथ ही निबंधन और जिला प्रशासन से भी प्रकरण पर जानकारी ली गई है। गौरतलब है कि एसआईटी की यह जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुरू हुई है। दूसरी तरफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इस प्रकरण की जांच कर रहा है। निदेशालय ने शहर में छापेमारी कर 15 मई को दो आरोपी भी गिरफ्तार किए थे।
प्रवर्तन निदेशालय की अब तक की जांच में सामने आया है कि स्पिरिचुअल रीजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एसआरएमएफ) ट्रस्ट की जमीन बेचा जाना एक तरह का जमीन घोटाला है। आरोप है कि जी राम चंद्र मोहन इस पूरे घोटाले का मुख्य सूत्रधार है। उसने वर्ष 2010 में खुद को ट्रस्ट का फर्जी कोषाध्यक्ष बताकर एक मिलता-जुलता छद्म नाम तैयार किया और फर्जी पैन कार्ड के जरिए बैंक खाते खोले। इस साजिश में उसका साथ आकाश मालवीय ने दिया, जिसने खुद को ट्रस्ट का कार्यकारी सदस्य बताकर फर्जी सेल डीड (बिक्री विलेख) पर हस्ताक्षर किए। बताया गया कि नोएडा में गेझा तिलपताबाद के रकबे में आने वाली जमीन 2024-025 में सिंह वाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को बेची गई थी। ईडी ने प्रकरण की जांच में निबंधन विभाग से दो सब-रजिस्ट्रार को बुलाकर पूछताछ की है। 1992 से अब तक संपत्ति से संबधित रजिस्ट्रियों का ब्यौरा मांगा है।
नोएडा: महर्षि आश्रम जमीन घोटाले पर शुरू हुई एसआईटी जांच

