• Tue. Sep 15th, 2026

India Core News | Read Latest Trending News..

आपका इंडिया आपकी न्यूज़

ग्रेटर नोएडा: जिम्स में हड़ताल पर बैठे कर्मियों को जबरन उठाया

जिम्स में 15 जून से हड़ताल पर बैठे करीब 700 आउटसोर्स कर्मचारियों को बुधवार रात करीब 8 बजे पुलिस ने बल प्रयोग करके हटा दिया। इसमें 70 कर्मी घायल हो गए। इनमें से दो में आईसीयू में भर्ती हैं। रात 12 बजे एक का बीपी 30 तक गिर कर आ गया था। वहीं दो अन्य भी गंभीर हालात में बताए जा रहे हैं। कर्मचारी किरण ने बताया कि पुलिस साथी कर्मचारियों को मारपीट कर बेसमेंट में ले गई। देर रात करीब 12:30 बजे कर्मियों को जिम्स की बस में भरकर पुलिस लाइन ले जाया गया।

ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित जिम्स अस्पताल में नियमितीकरण और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर धरने पर बैठे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बुधवार रात पुलिस ने बल प्रयोग कर धरना स्थल से खदेड़ दिया। कर्मचारियों को जबरन धरना स्थल से उठाकर पास के कमरे में बैठा दिया गया। बल प्रयोग में कई कर्मचारी घायल हुए हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के वीडियो भी सामने आए हैं।जिम्स के आउटसोर्सिंग कर्मचारी अस्पताल नियमित करने की मांग को लेकर 10 दिन से हड़ताल पर हैं। वे ओपीडी पर्ची हॉल में दिन-रात धरना दे रहे थे। कर्मचारियों के अनुसार बुधवार रात करीब 8 बजे कासना कोतवाली पुलिस बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंची और धरने पर बैठे पुरुष व महिला कर्मचारियों को खदेड़ना शुरू कर दिया। धरने में शामिल कर्मचारी आलोक यादव, गौरव नागर और दिनेश राणा ने बताया कि इससे कर्मचारी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कर्मचारियों का आरोप है कि पुलिस के लाठीचार्ज में कई कर्मचारी घायल हो गए। कई महिला कर्मी भी घायल हुईं।

एक महिला कर्मचारी के तो सिर में चोट लगी है। घायल कर्मचारियों का अस्पताल में उपचार चल रहा है। घटना के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं।पुलिस बोली- बाहर के लोगों ने की धक्का-मुक्कीपुलिस प्रवक्ता ने पूरे मामले पर विभाग का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से पुनः उन्हें दूसरे स्थान पर जाने का अनुरोध किया। इस दौरान कुछ कर्मचारी वहां से हटने को तैयार हो गए, लेकिन अन्य कर्मचारियों और बाहरी व्यक्तियों ने धक्का-मुक्की की। स्थिति को नियंत्रित करते हुए पुलिस ने संबंधित लोगों को वहां से हटाया। मारपीट और लाठीचार्ज किए जाने के आरोप पूरी तरह निराधार हैं

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )