अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। विभागों का बंटवारा भी हो चुका है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को वित्त विभाग सौंपा जाएगा? इस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है।
केंद्रीय बजट 2026 पर बात करते हुए फडणवीस ने कहा कि वित्त विभाग फिलहाल उनके पास रहेगा और राज्य का बजट वही पेश करेंगे। उन्होंने बताया कि इस संबंध में एनसीपी नेताओं से चर्चा हुई थी। उनके मुताबिक बजट केवल भाषण भर नहीं होता, बल्कि इसके पीछे कई विभागीय बैठकों और तैयारियों की लंबी प्रक्रिया होती है। ऐसे में सुनेत्रा पवार पर तुरंत इतनी बड़ी जिम्मेदारी डालना उचित नहीं होता।
उन्होंने कहा कि बजट सत्र के बाद वित्त विभाग को लेकर फैसला लिया जाएगा। सुनेत्रा पवार को आबकारी, खेल, अल्पसंख्यक विकास और वक्फ जैसे विभाग दिए गए हैं, जबकि वित्त और योजना विभाग, जो पहले अजित पवार के पास थे, अभी उनके पास नहीं हैं। सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनी हैं और राज्य की 11वीं डिप्टी सीएम हैं। उनका शैक्षणिक बैकग्राउंड कॉमर्स का है।
इस बीच एनसीपी के संभावित विलय को लेकर भी फडणवीस ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि अजित पवार ने उनके साथ किसी विलय पर कोई चर्चा नहीं की थी। अगर ऐसा कोई कदम उठाया जा रहा होता, तो वे जरूर उन्हें भरोसे में लेते। 12 फरवरी को कथित तौर पर विलय की घोषणा की बात पर भी उन्होंने अनभिज्ञता जताई।
फडणवीस ने साफ किया कि एनसीपी एक स्वतंत्र पार्टी है और अपने फैसले खुद ले सकती है, लेकिन गठबंधन सहयोगी होने के नाते बड़े फैसलों से पहले बीजेपी से चर्चा अपेक्षित है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अजित पवार विलय की दिशा में आगे बढ़ रहे होते, तो क्या वह बीजेपी को बताए बिना ऐसा करते? क्या वे एनडीए छोड़ने की तैयारी में थे?
इन बयानों के बाद एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर सियासी अटकलें और तेज हो गई हैं।