की समस्या से निपटने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सरकार के मुताबिक राजधानी के बड़े ड्रेनों की डी-सिल्टिंग का करीब 76 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। राजधानी में कुल 29 लाख मीट्रिक टन सिल्ट हटाने का लक्ष्य तय किया गया था, जिसमें अब तक 22 लाख मीट्रिक टन से अधिक सिल्ट निकाली जा चुकी है।
दिल्ली सरकार ने बताया कि इस बार मनसून के दौरान लोगों को जलभराव से राहत दिलाने के लिए समयबद्ध तरीके से नालों की सफाई कराई जा रही है। डी-सिल्टिंग के काम में आधुनिक मशीनों और तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे काम की गति और गुणवत्ता दोनों बेहतर हुई हैं। विभिन्न विभागों की ओर से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि बारिश के दौरान जिन इलाकों में हर साल जलभराव की समस्या सामने आती है, वहां विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नालों की सफाई के साथ जल निकासी व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि बारिश का पानी तेजी से निकल सके।
तैयारियां पहले के मुकाबले व्यवस्थित
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस बार मानसून से पहले की तैयारियों को पहले के मुकाबले ज्यादा व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाया गया है। लक्ष्य है कि बारिश के मौसम में लोगों को सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी परेशानियों का कम से कम सामना करना पड़े।
दिल्ली: 29 लाख मीट्रिक टन सिल्ट हटाने का लक्ष्य, 2 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा निकाली गई
की समस्या से निपटने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सरकार के मुताबिक राजधानी के बड़े ड्रेनों की डी-सिल्टिंग का करीब 76 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। राजधानी में कुल 29 लाख मीट्रिक टन सिल्ट हटाने का लक्ष्य तय किया गया था, जिसमें अब तक 22 लाख मीट्रिक टन से अधिक सिल्ट निकाली जा चुकी है।
दिल्ली सरकार ने बताया कि इस बार मनसून के दौरान लोगों को जलभराव से राहत दिलाने के लिए समयबद्ध तरीके से नालों की सफाई कराई जा रही है। डी-सिल्टिंग के काम में आधुनिक मशीनों और तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे काम की गति और गुणवत्ता दोनों बेहतर हुई हैं। विभिन्न विभागों की ओर से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि बारिश के दौरान जिन इलाकों में हर साल जलभराव की समस्या सामने आती है, वहां विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नालों की सफाई के साथ जल निकासी व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि बारिश का पानी तेजी से निकल सके।
तैयारियां पहले के मुकाबले व्यवस्थित
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस बार मानसून से पहले की तैयारियों को पहले के मुकाबले ज्यादा व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाया गया है। लक्ष्य है कि बारिश के मौसम में लोगों को सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी परेशानियों का कम से कम सामना करना पड़े।

