। अधिकरण ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने और प्रभावित क्षेत्र में 400 नए पेड़ लगाने के आदेश दिए हैं। पीठ ने थाना सुल्तानपुरी को पेड़ों की अवैध कटाई और चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, जांच रिपोर्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने को कहा है।
अधिकरण ने आदेश दिया कि प्रभावित क्षेत्र में 400 देशी प्रजाति के पेड़ लगाए जाएं। इसके अलावा पिछले पांच वर्षों में दिल्ली में हुई अवैध पेड़ कटाई की शिकायतों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और दोषियों के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं। पीठ ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक और उत्तर वन प्रभाग के उप वन संरक्षक को सभी वृक्ष अपराध मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। यह आदेश 12 मई 2026 को पारित किया गया। यह मामला विजय कुमार द्वारा दायर याचिका पर सुना गया। सुनवाई के दौरान एनजीटी की प्रधान पीठ ने पाया कि वर्ष 2023 में करीब 40 पेड़ों की अवैध कटाई की गई थी, जो दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 का उल्लंघन है। अधिकरण द्वारा बनाई गई संयुक्त समिति ने मौके का निरीक्षण कर अवैध कटाई की पुष्टि की। पीठ ने पर्यावरण संरक्षण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की देरी और लापरवाही पर भी नाराजगी जताई।
दिल्ली: हरित पट्टी में अवैध रूप से पेड़ काटे जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया
। अधिकरण ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने और प्रभावित क्षेत्र में 400 नए पेड़ लगाने के आदेश दिए हैं। पीठ ने थाना सुल्तानपुरी को पेड़ों की अवैध कटाई और चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, जांच रिपोर्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने को कहा है।
अधिकरण ने आदेश दिया कि प्रभावित क्षेत्र में 400 देशी प्रजाति के पेड़ लगाए जाएं। इसके अलावा पिछले पांच वर्षों में दिल्ली में हुई अवैध पेड़ कटाई की शिकायतों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और दोषियों के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं। पीठ ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक और उत्तर वन प्रभाग के उप वन संरक्षक को सभी वृक्ष अपराध मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। यह आदेश 12 मई 2026 को पारित किया गया। यह मामला विजय कुमार द्वारा दायर याचिका पर सुना गया। सुनवाई के दौरान एनजीटी की प्रधान पीठ ने पाया कि वर्ष 2023 में करीब 40 पेड़ों की अवैध कटाई की गई थी, जो दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 का उल्लंघन है। अधिकरण द्वारा बनाई गई संयुक्त समिति ने मौके का निरीक्षण कर अवैध कटाई की पुष्टि की। पीठ ने पर्यावरण संरक्षण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की देरी और लापरवाही पर भी नाराजगी जताई।

