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यूपी: CM की बैठक में हुई थी ये चर्चा

जेवर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश के बाद सड़कें जर्जर हो गई हैं जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी हो रही है। लोक निर्माण विभाग द्वारा मरम्मत के बावजूद सड़कें जल्दी ही टूट गईं। यमुना पुश्ता रोड और रजवाहे की सड़कें भी खस्ताहाल हैं। एनएचएआई के अधीन मार्गों की स्थिति भी खराब है जिससे लोगों में नाराजगी है। विधायक ने सड़कों की मरम्मत का आश्वासन दिया है।
। जेवर कस्बे और उसके आसपास के क्षेत्रों में पहले से खराब सड़कों का वर्षा के बाद बुरा हाल हो गया है। इन सड़कों से निकलने वाले दर्जनों गांव के हजारों को लोग को प्रतिदिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार विभाग इन मार्गों को सही कराना तो दूर सड़कों में बने गढ्ढों को पत्थर और रोड़ी डालकर भरवाना तक उचित नहीं समझ रहे। जिसकी वजह से लगातार समस्या बढ़ती जा रही है।

जेवर में ज्यादातर गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाले संपर्क मार्गों को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने मार्च से जून के बीच रिपेयर कराया था। खराब गुणवत्ता के चलते तीन माह के भीतर ही टूटना शुरू हो गए। जेवर कानीगढ़ी, जेवर शमशमनगर, जेवर खुर्जा मार्ग से बनवारीवास, थोरा, धनसिया दस्तमपुर को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों में जगह-जगह गढ्ढे हो गए हैं।

वहीं, सिंचाई विभाग के द्वारा बनाए गए यमुना पुश्ता रोड की सड़क सैकड़ों जगह धंस जाने से पुश्ता रोड में बड़े-बड़े गढ्ढे बन गए हैं। सिंचाई विभाग के ही सबौता रजवाहे की रामनेर से दयानतपुर तक और नीमका से सिवारा तक पटरी पर बनी सड़क पूरी तरह से टूट चुकी है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधीन (एनएचएआई) आने वाले मार्ग जेवर पलवल और जेवर से एयरपोर्ट जाने वाले मार्ग का बुरा हाल है। इस मार्ग में बने गढ्ढों से होकर एयरपोर्ट निर्माण सामग्री लाने वाले वाहन और एयरपोर्ट पर काम करने वाले हजारों श्रमिकों का दिनरात आना जाना लगा रहा है लेकिन एनएचएआई को इस मार्ग की सुध नहीं है


हाल ही में मेरठ में मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान एक-एक सड़क को लेकर सभी विधायकों के साथ चर्चा की थी। बैठक में जेवर की सड़कों के चौड़ीकरण, नवीनीकरण, सुदृढ़ीकरण करवाये जाने की कार्ययोजना स्वीकृत हो गई है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}