• Sun. May 17th, 2026

अभिषेक बनर्जी पर एफआईआर को टीएमसी ने बताया राजनीतिक बदला, भाजपा बोली- हेट स्पीच और भड़काऊ भाषा

अभिषेक बनर्जी पर एफआईआर को टीएमसी ने बताया राजनीतिक बदला, भाजपा बोली- हेट स्पीच और भड़काऊ भाषा

अभिषेक बनर्जी पर एफआईआर: राजनीतिक बदले के आरोप और भाजपा की कड़ी प्रतिक्रिया

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज एफआईआर ने राजनीतिक विवाद को हवा दे दी है। भाजपा ने इस एफआईआर का समर्थन करते हुए उनके भाषण को ‘‘गुंडों वाली भाषा’’ करार दिया, जबकि टीएमसी ने इसे भाजपा की राजनीतिक बदले की कोशिश बताया है।

पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी के कथित आक्रामक और भड़काऊ बयानों को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है। इस एफआईआर ने दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप को और तीव्र कर दिया है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने अभिषेक बनर्जी की भाषा की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की बातें लोकतंत्र में कभी स्वीकार्य नहीं हो सकतीं। उन्होंने कहा, “यह कोई नेता की भाषा नहीं बल्कि गुंडे की भाषा थी।”

भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने इस बात पर जोर दिया कि भाषण की स्वाधीनता किसी को घृणा और भड़काने की भाषा बोलने का अधिकार नहीं देती। उनका कहना था, “लोकतंत्र बहस और विचार विमर्श पर आधारित होता है न कि धमकी या गरीबी पर।” उन्होंने टीएमसी की राजनीति पर तुष्टीकरण और ध्रुवीकरण फैलाने का आरोप लगाया।

भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि अभिषेक बनर्जी के बयानों में अनुचित और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल हुआ है। उन्होंने कहा, “यदि कोई सभ्यता से बाहर निकलता है, तो कानून अपना काम करेगा।” भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी अभिषेक पर ‘‘जान से मारने’’ और ‘‘सिर कलम करने’’ जैसे नफरती बयान देने का आरोप लगाया।

पूनावाला ने यह भी कहा कि अभिषेक द्वारा संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देना गंभीर मामला है और यदि उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज होती हैं तो उन्हें अदालत में जवाब देना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक हिंसा टीएमसी के डीएनए में शामिल है।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने इस एफआईआर को भाजपा का राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट राजनीतिक मामला है। अभिषेक बनर्जी ने भाजपा के चुनावी वादों पर प्रतिक्रिया दी थी, जबकि भाजपा ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के विवादित बयानों के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की।”

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने भी एफआईआर को ‘‘फर्जी’’ करार दिया। उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी ने संविधान के तहत ही अपने विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह एफआईआर टीएमसी के तमाम नेताओं को दबाने के लिए एक सोची-समझी साजिश है।

इस विवाद ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के माहौल को और भी गरमाया है, जहां दोनों प्रमुख दल अपने-अपने पक्ष में राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगे हैं। आगामी चुनावों से पहले इस तरह के घटनाक्रम राजनीतिक बहस और विवादों को और बढ़ा सकते हैं।

Source

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)