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सख्त विशाखा समिति अनुपालन के बिना भी उचित आंतरिक जांच वैध: उच्च न्यायालय

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Apr 15, 2026 #icc
Fair Internal Inquiry Valid Even Without Strict Vishaka Committee Compliance: HC

सख्त विशाखा समिति अनुपालन के बिना भी उचित आंतरिक जांच को मान्यता: बॉम्बे उच्च न्यायालय का निर्णय

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की जांच केवल इसलिए अमान्य नहीं ठहराई जा सकती कि आंतरिक शिकायत समिति (ICC) विशाखा निर्देशों के तहत निर्धारित सटीक तरीके से गठित नहीं की गई थी, यदि जांच की प्रक्रिया निष्पक्ष हो और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करती हो।

यह निर्णय ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन फार्मास्यूटिकल्स से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान आया, जहां एक औद्योगिक न्यायालय ने कंपनी की आंतरिक जांच को विशाखा ढांचे का सख्ती से पालन न करने के कारण अमान्य करार दिया था।

उच्च न्यायालय ने कहा कि जांच प्रक्रिया में निष्पक्षता की सार्थकता तकनीकी प्रक्रियाओं से अधिक महत्वपूर्ण है। न्यायालय ने यह भी बताया कि यदि आरोपी को आरोपों की उचित सूचना, साक्ष्यों तक पहुंच और अपने बचाव प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर दिया गया है, तो जांच को मात्र तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।

न्यायालय ने उल्लेख किया कि विशाखा निर्देशों को उस समय कानून की अनुपस्थिति में लागू किया गया था, जबकि अब कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और सुधार) अधिनियम, 2013, इस प्रकार की शिकायतों के लिए वैधानिक आधार प्रदान करता है।

इस निर्णय में यह भी जोर दिया गया कि आंतरिक जांच को चुनौती देने के लिए केवल प्रक्रियात्मक त्रुटियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि वास्तविक नुकसान या प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन सिद्ध करना आवश्यक है।

अंततः, इस मामले को न्यायालय ने औद्योगिक न्यायाधिकरण को पुनर्विचार के लिए भेज दिया है ताकि इसके निष्पादन में उपयुक्त संशोधन और न्यायसंगत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)