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कर्नाटक सरकार ने आधिकारिक कार्यक्रमों में पोषण संबंधी निर्देश जारी किए, तली हुई स्नैक्स, दूध की चाय और कॉफी पर रोक

ByAnkshree

Apr 14, 2026 #bengaluru
Karnataka issues ‘nutrition advisory’ for official events, bans fried snacks, milk tea, coffee
बेंगलुरु, कर्नाटक। कर्नाटक सरकार ने अपने सभी आधिकारिक कार्यक्रमों में स्वस्थ और पोषणयुक्त भोजन को बढ़ावा देने के लिए एक नया पोषण मार्गदर्शक जारी किया है। इस निर्देश के अंतर्गत तली हुई स्नैक्स, दूध की चाय और कॉफी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। सरकार का उद्देश्य राज्य में संतुलित आहार को प्रोत्साहित करना और स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों को कम करना है।

राज्य सरकार द्वारा जारी इस ‘पोषण सलाह’ में कहा गया है कि आधिकारिक आयोजनों और सरकारी कार्यक्रमों में हल्के और पौष्टिक खाद्य पदार्थों का ही सेवन किया जाना चाहिए। तला हुआ भोजन, जो आमतौर पर उच्च वसा और कैलोरी से भरपूर होता है, उसे कार्यक्रमों से पूरी तरह से हटाने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही, दूध की चाय और कॉफी को भी सूची से बाहर रखा गया है, ताकि अधिक शुगर और कैफीन की मात्रा को नियंत्रित किया जा सके।

कर्नाटक के स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हम चाहते हैं कि सरकारी कार्यक्रम स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल हों। इससे न केवल कर्मचारियों के स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि जनता के लिए भी यह एक अच्छा संदेश जाएगा। हम चाहते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का चलन बढ़े और यह नीति उसी दिशा में एक कदम है।”

सरकार ने यह भी कहा है कि आधिकारिक आयोजनों में स्थानीय, मौसमी और ताजे खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें फल, सब्जियां, मोटे अनाज और बिना अत्यधिक संसाधित खाद्य पदार्थ शामिल हैं। यह नीति किसानों के हितों को भी बढ़ावा देगी क्योंकि स्थानीय उत्पादकों से ही सप्लाई की जाएगी।

इस दिशा में आगे बढ़ते हुए कई विभागों ने अपनी मेनू सूची में बदलाव कर लिए हैं। बेंगलुरु स्थित एक सरकारी अस्पताल के प्रबंधन ने बताया कि उन्होंने पहले ही अपने कैंटीन में तली हुई चीज़ों को हटाकर सूप, सलाद और फल उपलब्ध करवाना शुरू कर दिया है। इसी प्रकार, शासकीय कार्यालयों में जल स्रोतों को भी स्वच्छ रखने और स्वास्थ्यवर्धक पेयजल की उपलब्धता पर जोर दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कदम भारत में बढ़ती जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों जैसे मधुमेह, मोटापा और हृदय रोगों को कम करने में सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में स्वस्थ आहार पर ध्यान देकर एक बड़ा सामाजिक संदेश दिया जा सकता है, जो लोग परिवारों और समाज में भी अपनी छाप छोड़ेगा।

कर्नाटक सरकार का यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक माना जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में और भी राज्यों द्वारा इस तरह की नीतियां लागू की जाएंगी, जिससे पूरे देश में एक स्वस्थ और सक्रिय समाज का निर्माण हो सके।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )