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Cinema : “तेरे इश्क में” फ़िल्म रिव्यू : जुनून, दर्द और ‘रांझणा’ की यादें….

Movie : Tere Ishk Mein
फिल्म ‘तेरे इश्क में’ के ट्रेलर ने जबरदस्त फैंस के बीच बज बनाया था , लेकिन जब मूवी जब सिनेमाघरों में रिलीज हुई तब ये अपने बज पर उतनी खरी नहीं उतरी। आनंद एल राय की डायरेक्ट की हुई फिल्म एक इंटेंस रोमांटिक ड्रामा है, जिसमें धनुष और कृति सेनन लीड रोल निभाया है , ओपनिंग डे पर मूवी ने अच्छा प्रदर्शन किया और ऑडियंस को सिनेमा घरों तक खींचा , इसने साल 2025 में रिलीज हुई करीब 32 फिल्मों के ओपनिंग डे के कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया।

‘तेरे इश्क में’ आनंद एल. राय और धनुष की जोड़ी को एक बार फिर पर्दे पर लाती है, जो उनकी पिछली कल्ट हिट ‘रांझणा’ की याद ताज़ा करती है। यह फ़िल्म शंकर गुरुक्कल (धनुष) की कहानी है, जो बचपन के गहरे ट्रॉमा से जूझता हुआ एक हिंसक, गुस्सैल, लेकिन बेहद संवेदनशील नौजवान है। वह दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन का प्रेसिडेंट है। उसकी ज़िंदगी में मुक्ति बेनीवाल (कृति सेनन) आती है, जो बिहेवियरल साइकोलॉजी पर पीएचडी कर रही है और अपने थीसिस के लिए शंकर की मदद लेती है। मुक्ति का इरादा पेशेवर है, लेकिन शंकर को उससे जुनून की हद तक मोहब्बत हो जाती है। यह फ़िल्म एकतरफा प्यार, दीवानगी और उसके टूटने के बाद के दर्द को दिखाती है, जिसमें शंकर एक ऐसे आशिक के रूप में उभरता है, जो अपनी मोहब्बत के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। कहानी दिल्ली से शुरू होकर बनारस के घाटों तक जाती है, जो हमें ‘रांझणा’ के कुंदन की दुनिया से जोड़ती है।

अभिनय

धनुष फ़िल्म की जान और सबसे बड़ी ताक़त हैं। शंकर गुरुक्कल के किरदार में उनकी आँखें गुस्सा, दर्द और जुनून सब एक साथ बयाँ करती हैं। ‘रांझणा’ के बाद एक बार फिर जुनूनी आशिक के रूप में उनका अभिनय बेहतरीन है। उनका आक्रोश, उनके चेहरे की भावनाएं हर फ्रेम में असर छोड़ती हैं और कई जगहों पर तो वह अपने दमदार प्रदर्शन से फ़िल्म को संभाल लेते हैं।

कृति सेनन ने मुक्ति के किरदार को ईमानदारी से निभाया है। उनका काम सराहनीय है, लेकिन इंटेंस दृश्यों में कई जगह वह धनुष के सामने थोड़ी कमज़ोर महसूस होती हैं।

जीशान अय्यूब का किरदार छोटा लेकिन बेहद असरदार है। धनुष और जीशान के बीच की केमिस्ट्री, उनकी दोस्ती और डायलॉग्स की समझ दर्शकों को ‘रांझणा’ के कुंदन और मुरारी की याद दिलाती है, और उनके दृश्य सीधे दिल में उतरते हैं। प्रकाश राज भी अपने छोटे लेकिन महत्वपूर्ण रोल में बेहतरीन हैं।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष

निर्देशक आनंद एल. राय फ़िल्म के पहले भाग में पूरी पकड़ बनाए रखते हैं। शंकर और मुक्ति के बीच की केमिस्ट्री को स्थापित करने और शंकर के गुस्सैल स्वभाव को दिखाने वाले कई सीन शानदार ढंग से फ़िल्माए गए हैं। हालांकि, दूसरे हाफ में कहानी थोड़ी भटकती हुई महसूस होती है और कुछ हिस्सों में पटकथा हल्की लगती है, जिससे फ़िल्म थोड़ी लंबी भी लगने लगती है।

फ़िल्म का बैकग्राउंड स्कोर और कैमरा वर्क बहुत अच्छा है, जो इमोशनल सीन को और भी गहराई देता है। ए. आर. रहमान के संगीत से थोड़ी और उम्मीदें थीं, लेकिन टाइटल ट्रैक ‘तेरे इश्क में’ और ‘आवारा’ जैसे गाने दमदार हैं और कहानी को आगे बढ़ाते हैं।

क्यों देखें?

अगर आपको जुनून से भरी, इंटेंस रोमांटिक ड्रामा, दिल को छू लेने वाले भाव और कच्चे, सच्चे किरदारों की कहानी देखना पसंद है, तो ‘तेरे इश्क में’ आपके लिए है। फ़िल्म में कुछ कमियां ज़रूर हैं, लेकिन धनुष का शानदार अभिनय, ए. आर. रहमान का संगीत और आनंद एल. राय का निर्देशन इस कहानी को एक बार देखने लायक बना देता है

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

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