स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार फरीदाबाद में प्रति एक हजार आबादी पर अस्पताल के बेड की संख्या राष्ट्रीय मानकों से कम है। इसका सीधा असर यह है कि जिला अस्पताल और सरकारी सीएचसी पर ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं का दबाव लगातार बढ़ रहा है। शहरी क्षेत्रों जैसे एनआईटी, बल्लभगढ़, ओल्ड फरीदाबाद और ग्रेटर फरीदाबाद में निजी अस्पतालों की संख्या अधिक है लेकिन सरकारी अस्पतालों पर निर्भर आबादी भी कम नहीं है। वहीं तिगांव, छांयसा, मोहना, दयालपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में एक-एक स्वास्थ्य केंद्र पर कई गांवों की जिम्मेदारी है, जिससे प्रति केंद्र आबादी का बोझ काफी अधिक हो जाता है। कम सुविधाओं वाले इलाके होंगे चिन्हित
जीआईएस मैपिंग के जरिए पहली बार यह स्पष्ट होगा कि जिले के किन इलाकों में अस्पताल या पीएचसी तक पहुंचने के लिए लोगों को 10 से 15 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीण और शहरी सीमांत क्षेत्रों में ट्रॉमा केयर, एंबुलेंस और विशेषज्ञ उपचार की क्या स्थिति है। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण फरीदाबाद में सड़क दुर्घटनाएं, सांस संबंधी बीमारियां और जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं आम हैं लेकिन इनके अनुपात में ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी सुविधाएं काफी सीमित हैं।

