गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान हरदीप सिंह उर्फ प्रिंस (39) निवासी दिल्ली, जितेन्द्र झा (26) निवासी समस्तीपुर बिहार, पुनीत अग्रवाल (26) निवासी पश्चिम दिल्ली और शिवम (25) निवासी विजय एन्क्लेव नई दिल्ली के रूप में हुई है। गिरोह का मास्टरमाइंड हरदीप सिंह है। वह नई दिल्ली में अकाउंटेंसी से जुड़े कार्य करता था। एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से दो लैपटॉप, नौ मोबाइल, तीन आधार कार्ड और 50,840 रुपये नकद बरामद किए हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बड़ी संख्या में ई-मेल आईडी, जीएसटी पोर्टल लॉग-इन डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं।
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार आरोपियों को शुक्रवार को एसटीएफ फील्ड यूनिट नोएडा कार्यालय में पूछताछ के दौरान गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले एसटीएफ की टीम को 8 जनवरी को बोगस फर्मों के जरिये फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल बनाकर करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी की सूचना मिली थी। ऐसे चलता था पूरा खेल
पूछताछ में सामने आया कि हरदीप सिंह अपने सहयोगियों जितेन्द्र झा, पुनीत अग्रवाल, आलोक अग्रवाल और शिवम के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज के आधार पर बोगस फर्मों का पंजीकरण कराता था। इन फर्मों के नाम पर बिना किसी वास्तविक खरीद-फरोख्त के फर्जी सेल्स इनवॉइस तैयार किए जाते थे। जिसके आधार पर फर्जी ई-वे बिल बनाकर जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किए जाते थे। वास्तविक फर्मों के मालिक अपना जीएसटी नंबर, माल या सेवा का विवरण, मात्रा और कीमत की जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से हरदीप सिंह को भेजते थे। इसके बाद गिरोह द्वारा बोगस फर्मों के नाम से इनवॉइस और ई-वे बिल जनरेट कर जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किया जाता था और संबंधित वास्तविक फर्मों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ दिलाया जाता था। बैंकिंग और सर्कुलर ट्रेडिंग का लिया जा रहा था सहारा
फर्जी लेन-देन को वास्तविक दिखाने के लिए बोगस फर्मों और वास्तविक फर्मों के बीच बैंक खातों के माध्यम से धनराशि ट्रांसफर दिखाई जाती थी। इसके बाद उस राशि को कैश या सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिये वापस निकाल लिया जाता था। अभियुक्तों के पास विभिन्न फर्मों की लॉग-इन आईडी, पासवर्ड और मोबाइल नंबर होते थे, जिससे वे ओटीपी प्राप्त कर आसानी से बैंक ट्रांजैक्शन और जीएसटी रिटर्न फाइलिंग कर लेते थे। कई राज्यों में पंजीकृत कराईं बोगस फर्म
एसटीएफ की जांच पता चला है कि आरोपियों ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित कई राज्यों के पते पर दर्जनों बोगस फर्में पंजीकृत कराई थीं। मोबाइल फोन की जांच में 30 से अधिक ई-मेल आईडी मिली हैं।

