पीड़ितों ने सीएम विंडो के माध्यम से मुख्यमंत्री से शिकायत कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। तिरवाड़ा गांव निवासी वसीम ने बताया कि वर्ष 2024 में उसके साथी मौसिम ने उसकी मुलाकात तेड गांव निवासी डॉ. मोइन से कराई थी। डॉ. मोइन ने भरोसा दिलाया कि वह सरकारी अस्पताल में वार्ड बॉय की नौकरी लगवा सकता है। आरोप है कि डॉ. मोइन अपने दो भाइयों के साथ मिलकर गांव तेड में निजी अस्पताल चलाता है और इसी दौरान उसने नौकरी दिलाने का झांसा दिया।
वसीम के अनुसार, उसने अपने तीन साथियों अजरू निवासी डूडोली, रोहताश निवासी पुन्हाना और मुर्सरफ निवासी तिरवाड़ा के साथ मिलकर प्रति व्यक्ति 35 हजार रुपये के हिसाब से कुल एक लाख 40 हजार रुपये आरोपी डॉक्टर को दिए। यह रकम मौसिम निवासी डूडोली की मौजूदगी में दी गई। आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि नौकरी पक्की हो गई है और कुछ ही दिनों में ज्वाइनिंग लेटर मिल जाएगा। पीड़ितों का आरोप है कि कुछ दिन बाद आरोपियों ने उन्हें फर्जी ज्वाइनिंग लेटर और आईडी कार्ड थमा दिए। जब वे इन दस्तावेजों के साथ ड्यूटी ज्वाइन करने पहुंचे तो वहां उन्हें बताया गया कि ऐसे किसी आदेश या नियुक्ति का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ। पीड़ितों ने बताया कि जब वे पैसे वापस मांगने के लिए आरोपियों के घर पहुंचे तो एक भाई इमरान ने कुछ दिनों का समय मांगा। कुछ समय बाद आरोपियों ने एक व्यक्ति के पैसे लौटा दिए लेकिन बाकी तीन लोगों के पैसे आज तक वापस नहीं किए गए। पीड़ितों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया जाए और ठगी की रकम वापस दिलाई जाए।

