प्राप्त जानकारी के अनुसार, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, शव को ठीक से ढकने या पैक करने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा परिजनों से तीन हजार रुपये की मांग की गई। जब परिजन इस मांग का विरोध कर रहे थे, तब यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई और वीडियो तेजी से फैल गया। यह घटना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह
हालांकि, इस मामले में परिजनों की ओर से अभी तक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। इसके बावजूद, वीडियो के वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। यह घटना इस बात का संकेत देती है कि कहीं न कहीं सरकारी व्यवस्था में खामियां हैं, जिनका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है। सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी सरकारी पोस्टमार्टम हाउस में शव को कवर करने और अन्य मूलभूत सुविधाएं निशुल्क प्रदान की जानी चाहिए। यह सुविधा नागरिकों को बिना किसी शुल्क के मिलनी चाहिए। लेकिन नोएडा की यह घटना दर्शाती है कि नियमों का पालन कितना हो रहा है और कहां उल्लंघन हो रहा है।

