दिल्ली हाईकोर्ट ने EWS उम्मीदवारों को SC, ST, OBC के समान आयु छूट का दावा करने से रोका
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवारों को श Scheduled Castes (SC), Scheduled Tribes (ST) और Other Backward Classes (OBC) के बराबर आयु सीमा में छूट या प्रयासों की संख्या में समानता का दावा करने का अधिकार नहीं है। यह निर्णय सामाजिक पिछड़े वर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच असमानताओं को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।
इस मामले की सुनवाई न्यायमंडल के दो न्यायाधीशों, न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की बेंच ने की, जिन्होंने EWS उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिका पर विचार किया। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि 103वें संविधान संशोधन के तहत EWS वर्ग के लिए 10% आरक्षण की व्यवस्था होने के बावजूद, आयु छूट जैसे सहायक लाभों की अनुपस्थिति उन्हें अन्य वर्गों की तुलना में असहाय बनाती है।
यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) के नियमों के अनुसार, SC और ST वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम 5 वर्ष की आयु सीमा में छूट मिलती है, जबकि OBC उम्मीदवारों को अधिकतम 3 वर्ष की छूट प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, इन उम्मीदवारों को परीक्षा में अधिक प्रयास करने की भी अनुमति होती है।
हालांकि, अदालत ने यह स्वीकार किया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और सामाजिक पिछड़े वर्गों के बीच जो असमानताएं हैं, वे स्वाभाविक रूप से भिन्न हैं। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि EWS का उद्देश्य आर्थिक आधार पर संरक्षण प्रदान करना है, जबकि SC, ST, और OBC वर्ग सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन के चलते आरक्षण पाते हैं।
इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया कि केंद्र सरकार द्वारा तय मानदंडों के तहत अलग-अलग वर्गों के लिए आरक्षण और अन्य लाभों को अलग-अलग माना जाएगा। न्यायालय की यह मंशा सामाजिक और आर्थिक विविधताओं को समझते हुए न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना है।
यह निर्णय EWS वर्ग के लिए सहायक लाभों को लेकर चर्चा और उनके अधिकारों के दायरे में स्पष्टता लाने वाला है। साथ ही, यह सामाजिक न्याय और संवैधानिक प्रावधानों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास भी है।