सुप्रीम कोर्ट का फैसला: अल्पसंख्यकों के मतदान अधिकारों पर बड़ा प्रभाव
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने 29 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण निर्णय में लुइज़ियाना के कांग्रेसियाई नक्शे में स्थित एक अश्वेत-अधिकांश जिले को “असंवैधानिक जनसंख्या भागीदारी” घोषित कर इसे रद्द कर दिया और मतदान अधिकार अधिनियम की व्याख्या में बदलाव किया। इस फैसले से अल्पसंख्यक समुदायों के वोटिंग पावर में गिरावट की संभावना जताई जा रही है।
छह-तीन के आंकड़े में कंजरवेटिव बहुमत ने तर्क दिया कि लुइज़ियाना ने दूसरी अश्वेत-अधिकांश जिले को बनाकर कानून का उल्लंघन किया है। न्यायाधीश सैमुअल एलिटो ने इस फैसले को मतदान अधिकार अधिनियम की धारा 2 के समर्थन में बताया, जो “ऐसे मतदान अभ्यास या प्रक्रियाओं को रोकता है जो जाति, रंग, या भाषाई अल्पसंख्यक समूहों के आधार पर भेदभाव करते हों।”
हालांकि, कंजरवेटिव न्यायाधीशों ने इसके लागू होने की व्याख्या को ऐतिहासिक परिस्थितियों के आधार पर पुनर्परिभाषित किया। इसके चलते, इस अधिनियम के तहत पुनर्विभाजन योजनाओं को चुनौती देना अब और भी कठिन हो गया है।
न्यायमूर्ति एलिना कागन ने अलग मत दिया और इसे मतदान अधिकार अधिनियम के विध्वंस की “नवीनतम कड़ी” करार दिया। कागन ने अन्य दो उदार न्यायाधीशों के साथ मिलकर कहा कि यह निर्णय जाति के आधार पर पुनर्विभाजन करना लगभग असंभव बना देगा और भेदभाव साबित करने में भारी कठिनाई पैदा करेगा।
यह फैसला इतिहास में अल्पसंख्यकों के लिए मतदान अधिकारों की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा, जिससे अमेरिका में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर गहरा असर पड़ने की आशंका है।