15 साल से अपरिवर्तित टैक्सी किराया, दिल्ली-एनसीआर में 21 से 23 मई तक श्रमिक हड़ताल
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर के निजी टैक्सी चालकों ने पिछले 15 वर्षों से टैक्सी किराये में कोई वृद्धि न होने के कारण 21, 22 और 23 मई को हड़ताल का आह्वान किया है। सीएनजी और महंगाई में लगातार वृद्धि के बावजूद किराया स्थिर रहने से चालक गंभीर आर्थिक दबाव में हैं।
चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर, जिन्हें ‘अन्ना’ के नाम से जाना जाता है, ने सरकार पर चालकों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि कई सालों से किराया बढ़ाने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
अनुज राठौर के अनुसार, “दिल्ली-एनसीआर सीटी टैक्सी स्कीम के तहत करीब 15 साल पहले जो किराया निर्धारित किया गया था, उसमें आज तक कोई संशोधन नहीं हुआ है। बढ़ती महंगाई और रोजाना बदलती सीएनजी की कीमतों के कारण मजबूरन 21 से 23 मई तक हड़ताल करनी पड़ रही है।”
हड़ताल में दिल्ली-एनसीआर के सभी टैक्सी चालक शामिल हो रहे हैं। यूनियन की मुख्य मांग 15 साल पुराने किराये में वास्तविक वृद्धि है ताकि चालक अपनी रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।
उन्होंने बताया कि मामला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है जहाँ टैक्सी किराया बढ़ाने के निर्देश भी दिये गए थे, बावजूद इसके अब तक कोई संशोधन नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “2015 में बनाई गई टैक्सी स्कीम आज भी लागू है जबकि 2026 आ चुका है, और सीएनजी की कीमत हर तीसरे दिन बढ़ रही है।”
अनुज राठौर ने कहा कि ओला, उबर, रैपिडो जैसे सभी टैक्सी प्लेटफॉर्म के चालक हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं क्योंकि वे भी बढ़ती लागतों से परेशान हैं।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया, “हम गरीब और मेहनत करने वाले लोगों के लिए किराया बढ़ाएं।” उन्होंने दिल्ली की सभी यूनियनों से इस आंदोलन को समर्थन देने की अपील भी की है।
दिल्ली-एनसीआर में टैक्सी चालकों की यह हड़ताल उनके लंबे समय से चली आ रही मांगों का परिणाम है, जिसमें सरकार की संवेदनशीलता और आर्थिक वास्तविकताओं के बीच सामंजस्य की आवश्यकता को दर्शाया गया है। यह आंदोलन टैक्सी उद्योग के टिकाऊ विकास और चालकों के जीवन स्तर में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।