मध्य प्रदेश सरकार ने भोजशाला प्रदर्शन के मृतकों के परिवारों को पांच लाख रुपये की वित्तीय सहायता का ऐलान किया
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को 2003 के भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को मंदिर घोषित करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन में मारे गए तीन व्यक्तियों के परिवारों को प्रति परिवार 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने का ऐलान किया। यह जानकारी The Hindu ने दी।
यह ऐतिहासिक 11वीं सदी का भवन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है और हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों द्वारा इसे अपनी सांस्कृतिक विरासत माना जाता है। हिंदू समुदाय का मानना है कि भोजशाला देवी वाग्देवी या सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है, जबकि मुस्लिम समुदाय के अनुसार यह एक मस्जिद है।
फरवरी 2003 में विश्व हिंदू परिषद समेत कई हिंदुत्ववादी संगठनों ने इस स्थल के पूर्ण प्रवेश की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन की शुरुआत की, जिसमें यह दावा किया गया था कि यह मंदिर पर्मार वंश के राजा भोज द्वारा निर्मित था। उस समय सुरक्षा बलों के साथ हुए संघर्ष में वन् सिंह अराड़ी, लक्ष्मण सिंह और अनवर सिंह की मृत्यु हो गई।
इसके पश्चात 7 अप्रैल 2003 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा एक व्यवस्था लागू की गई, जिसके अंतर्गत मंगलवार को हिंदू पूजा-अर्चना करते और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज अदा करते थे।
फिर 15 मई को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने विवादित परिसर को हिंदू देवी सरस्वती का मंदिर घोषित करते हुए 2003 के पुरातत्व सर्वेक्षण के आदेश को खारिज कर दिया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने धार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस सहायता योजना की घोषणा करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के सम्मान की बात कही। यह कदम विवादित स्थल से जुड़े पुराने विवादों को कम करने और पीड़ित परिवारों के प्रति न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।