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पानी के भंडार संकट के स्तर पर पहुँचे; मानसून की देर से आई बारिश ने झीलों के जल संग्रह को प्रभावित किया

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Jun 22, 2026 #source
Water Reserves Drop to Critical Levels; Delayed Monsoon Impacts Lake Storage

मुंबई के जल भंडार में गंभीर गिरावट, देरी से आई मानसून बारिश ने बढ़ाई चिंता

हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार मुंबई के पीने के पानी के भंडार में स्वाभाविक स्तर से काफी कमी आई है, जिसका मुख्य कारण इस वर्ष मानसून की देरी और कमजोर बारिश है। शहर की जल आपूर्ति के लिए आवश्यक झीलों का संग्रह इस बार अत्यंत कम दर्ज किया गया है, जिससे जल संकट की आशंका बढ़ गई है।

हाइड्रोलिक इंजीनियर विभाग द्वारा 21 जून 2026 को जारी रिपोर्ट में बताया गया कि मुंबई के सात प्रमुख जलाशयों में केवल 1,44,736 मिलियन लीटर जल संग्रहित था, जो कुल संग्रह क्षमता का केवल 8.68 प्रतिशत है। यह संख्या शहर की वार्षिक जल आवश्यकता को पूरा करने के लिए बेहद कम है।

शहर के जल स्रोतों में अपर वैतरना, मोदक सागर, टांसा, मिडिल वैतरना, भांटसा, विहार और तुलसी झीलें शामिल हैं। इनमें से अधिकांश जलाशयों में जल स्तर मानसूनी मौसम के औसत से काफी कम पाया गया है, जो वर्षा के अभाव और कमजोर मानसून गतिविधि के कारण हुआ है।

इनमें से भांटसा झील में जल संग्रहित मात्रा सबसे अधिक रही, जो कि 57,288 मिलियन लीटर है, परंतु यह भी उसकी कुल क्षमता का एक छोटा भाग ही है। मिडिल वैतरना और मोदक सागर में भी जल स्तर न्यूनतम है। अपर वैतरना झील का जल स्तर इतना घट गया है कि वहाँ से जल निकासी फिलहाल बंद हो चुकी है।

पिछले 24 घंटों में हुई बारिश की जानकारी देखें तो अधिकांश जल संचयन क्षेत्रों में वर्षा नगण्य रही। मोदक सागर और मिडिल वैतरना में लगभग कोई बारिश नहीं हुई, जबकि भांटसा, विहार और तुलसी क्षेत्रों में भी कोई महत्वपूर्ण वर्षा दर्ज नहीं की गई। भांडूप परिसर, जो शहर का प्रमुख जल नियंत्रण केन्द्र है, वहाँ मात्र 1 मिलीमीटर बारिश ही हुई।

पिछले वर्ष की इसी अवधि के तुलनात्मक आंकड़ों में जून 2025 में जल भंडार लगभग 3.74 लाख मिलियन लीटर थे, जो संग्रहित क्षमता का 26 प्रतिशत रहा। इस बार इतनी भारी कमी लेकर आए मानसून की देरी महाराष्ट्र में जल संग्रहण की स्थिति को प्रभावित कर रही है।

इस जल संकट के मद्देनजर प्रशासन ने कई जगह पानी की कटौती की घोषणाएं भी की हैं तथा जलाशयों की सतत निगरानी जारी है। मिडिल वैतरना से जलनिकासी नवंबर 2025 से शुरू हो चुकी है, वहीं अपर वैतरना से गत 20 जून को जल निकासी रोक दी गई क्योंकि जल स्तर ड्रॉएबल लिमिट से नीचे आ गया था।

अब नागरिकों और प्रशासन दोनों की उम्मीदें गति से और व्यापक वर्षा की ओर केंद्रित हैं, जिससे जलाशयों में जल स्तर पुनः सामान्य हो सके। इस वक्त पानी की उपलब्धता और प्रबंधन की चिंताएं प्राथमिकता बनी हुई हैं और भविष्य की योजना इसी को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)