बीएमसी चुनाव के दौरान भी उत्तर भारतीयों के मुद्दे को लेकर मुखर रही मनसे का तर्क है कि बिहार से आने वाले मरीजों की समस्या का स्थायी समाधान तभी होगा, जब बिहार में ही अत्याधुनिक चिकित्सा ढांचा मजबूत किया जाए। गौरतलब है कि बिहार सरकार ने मुंबई में बिहार भवन के निर्माण के लिए 314.20 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसके लिए मुंबई पोर्ट ट्रस्ट से करीब एक एकड़ जमीन 90 साल की लीज पर ली जा चुकी है।
बिहार फाउंडेशन के मुंबई प्रवक्ता मनोज सिंह राजपूत के मुताबिक, बिहार भवन के निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। पिछले वर्ष बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट की जमीन इसके लिए आवंटित की गई थी और इस साल बिहार कैबिनेट ने निर्माण के लिए 314 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।
प्रस्तावित बिहार भवन को वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से लैस बताया जा रहा है। करीब 70 मीटर ऊंचे इस भवन में रेजिडेंट कमिश्नर, निवेश आयुक्त, पर्यटन विभाग, कला एवं संस्कृति विभाग और बिहार फाउंडेशन के कार्यालय होंगे। साथ ही बिहार से इलाज के लिए आने वाले कैंसर मरीजों के ठहरने के लिए 240 बेड की डॉरमेट्री की व्यवस्था की जाएगी। भवन में कुल 178 कमरे, 233 वाहनों की पार्किंग, 72 सीटों वाला आधुनिक कॉन्फ्रेंस हॉल और कैफेटेरिया भी प्रस्तावित है।
मनोज सिंह राजपूत का कहना है कि करीब 15 वर्षों के प्रयास के बाद मुंबई में बिहार भवन का सपना साकार होने जा रहा है, जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अहम भूमिका रही है। इस भवन के बनने से बिहार से आने वाले कैंसर मरीजों को ठहरने में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि मनसे ने इस योजना पर कड़ा एतराज़ जताया है। पार्टी के नवनिर्वाचित पार्षद यशवंत किल्लेदार ने कहा कि बिहार सरकार को मुंबई में भवन बनाने के बजाय बिहार में ही बेहतर इलाज की सुविधाएं विकसित करनी चाहिए।
वहीं, इस विरोध पर पलटवार करते हुए भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और नवनिर्वाचित पार्षद नवनाथ बन ने मनसे पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि क्षेत्रवाद और विवादित भाषा की राजनीति की वजह से ही हालिया मनपा चुनाव में मनसे को नुकसान उठाना पड़ा है, इसलिए ऐसे मुद्दों पर विरोध करने से पहले आत्ममंथन जरूरी है।

