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Delhi : असंगठित क्षेत्र के 90% से ज्यादा श्रमिकों को उनके विकास, रोजगार और स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण का प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का डर

ByICN Desk

Jan 22, 2024

Report By : Ankit Srivastav (Delhi)

दिसंबर 2023 के दौरान, दिल्ली ने पिछले पांच वर्षों में अपनी सबसे खराब वायु गुणवत्ता झेली थी, जो 348 के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के साथ- 2018 में 360 तक पहुंचे सूचकांक के बाद से सर्वाधिक रही। हेल्प डेल्ही ब्रीथ एंड महिला हाउसिंग ट्रस्ट के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, खासकर दिल्ली की लैंडफिल साइटों के पास रहने वाले लोगों को, बाहरी गतिविधियों के दौरान भारी जोखिम का सामना करने, रहने की प्रतिकूल स्थितियों, जानलेवा कार्यस्थलों और सामाजिक भेदभाव के कारण प्रदूषण के गंभीर असर झेलने पड़ते हैं। पहले से ही बेहद खराब मौसम, वायु प्रदूषण और हरी-भरी जगहों के अभाव जैसी विभिन्न चुनौतियों से प्रभावित इन श्रमिकों ने, प्रदूषण फैलाने वाली कंपनियों के बंद होने की सूरत में नौकरी छूट जाने की चिंताएं व्यक्त कीं। लगभग 42% श्रमिकों का यह भी कहना था कि सरकार को नौकरियां बचाने पर जोर देते हुए, शहर में प्रदूषण फैलाने वाली कंपनियों को बंद करने से बचना चाहिए। 77% उत्तरदाताओं को आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच टकराव दिखाई दिया, जबकि 95% प्रतिभागियों ने नौकरी चले जाने के डर के चलते, कार्यस्थल पर प्रदूषण से जुड़े मुद्दों को उठाने से बचने की बात स्वीकार की।

इसको लेकर अभियान चलाने वाली गुरप्रिया सिंह का कहना है कि ‘चूंकि दिल्ली में भारी वायु प्रदूषण के समय निर्माण कार्य बंद कर दिए जाते हैं, इसलिए यह पहचानना जरूरी हो जाता है कि इसका असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की पहले से ही अनिश्चित आजीविका और आर्थिक सुरक्षा पर कैसा असर पड़ता है। हेल्प डेल्ही ब्रीथ और एमएचटी, इस मुद्दे पर जागरूकता पैदा करने तथा श्रमिकों को बचाने में मदद करने वाली सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के साथ उन्हें जोड़ने का काम कर रहे हैं।’

सर्वेक्षण में पांच अलग-अलग जगहों पर असंगठित क्षेत्र के कुल 590 श्रमिकों को शामिल किया गया, जिनमें से 91% दिल्ली के स्थायी निवासी थे। अवैध बस्तियों के निवासियों में निर्माण से जुड़े श्रमिकों की संख्या सर्वाधिक (46.6%) है, इसके बाद कचरा बीनने वालों (10.2%) और रेहड़ी-पटरी वालों (6.9%) का नंबर आता है।

महिला हाउसिंग ट्रस्ट की निदेशक बीजल ब्रह्मभट्ट बताती हैं कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के चलते, दिहाड़ी मजदूरों, रेहड़ी-पटरी वालों और कूड़ा बीनने वालों सहित अवैध बस्तियों में रहने वाले श्रमिकों को स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बीजल ने कहा- “भलस्वा जैसी बस्तियों में कचरा बीनने वालों को वायु प्रदूषण के अलावा दूषित पानी, कचरा जलाने से निकलने वाले जहरीले धुएं और पर्याप्त सुरक्षात्मक उपकरणों के बिना जहरीले कचरे को संभालने जैसी अनेक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए, विभिन्न हितधारकों को उनके लिए कौशल विकास और प्रशिक्षण देने वाले कार्यक्रम पेश करने हेतु ज्यादा सटीक कदम उठाने होंगे। इससे उन्हें रोजगार के वैकल्पिक अवसर तलाशने में मदद मिलेगी और पेट चलाने के लिए उनकी कचरा बीनने पर निर्भरता कम होगी। जब असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की आजीविका सुरक्षित हो जाती है, तभी वे जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने के काबिल होते हैं।“

असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के साथ अपने जुड़ाव के तहत, महिला हाउसिंग ट्रस्ट और हेल्प डेल्ही ब्रीथ, महिलाओं को एक्यूआई एम्बेसडर या वायु मित्रों के रूप में प्रशिक्षित कर रहे हैं, ताकि इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने के साधन के रूप में वे अपने पास-पड़ोस के हाइपरलोकल एक्यूआई डेटा को पढ़ सकें और उसकी निगरानी कर सकें।

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