आरजी कार मेडिकल कॉलेज बलात्कार-हत्या मामले के संदर्भ में आंदोलन और आशा की कहानी
कोलकाता की सक्रिय समाजसेविका रिमझिम सिन्हा ने 2016 से महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है। यह संघर्ष पहले प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी की छात्रा के रूप में शुरू हुआ और अब एक व्यापक महिला आंदोलन का हिस्सा बन गया है। हालांकि, उनका मानना है कि उनकी आवाज़ पहले कभी सौ-पंद्रह लोगों से आगे नहीं बढ़ सकी।
लेकिन 14 अगस्त 2024 को उनके रात्रि दखल की अपील पर लाखों महिलाएं बंगाल और देश के अन्य हिस्सों से उतरीं। इस अप्रत्याशित सफलता ने रिमझिम सिन्हा सहित सभी को चकित कर दिया।
कोलकाता में उस सप्ताह आरजी कार मेडिकल कॉलेज के एक प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ हुई बेरहमी से सबका ध्यान उस गंभीर सामाजिक मुद्दे की ओर मोड़ गया था। प्रशिक्षु डॉक्टर पर दिन की बजाय रात की शिफ्ट के दौरान हमला हुआ था, जो पूरे शहर में व्याप्त असुरक्षा की अनदेखी को उजागर करता है।
पूर्व प्राचार्य संदीप घोष ने पीड़िता पर दोषारोपण करते हुए अस्पताल के सेमिनार कक्ष में देर रात रहने को कटघरे में खड़ा किया। इस आरोप के खिलाफ समाज की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए रिमझिम ने महिलाओं से ‘रात दखल’ की मांग की, जिसका प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखा।
रिमझिम के अनुसार, इस अपील ने पीड़िता की मां रत्ना देवनाथ को पुनः उम्मीद दी। आंदोलन के बीच रत्ना ने रिमझिम से अगली रात्रि दखल की योजना बनाने को कहा और स्वयं भी इसमें शामिल होने की इच्छा जताई।
यह संघर्ष उन सभी के लिए एक प्रेरणा बन गया है जो न्याय, सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। सामाजिक जागरूकता बढ़ाने तथा महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के इस अभियान की व्यापक चर्चा अब सभी वर्गों तक पहुंच रही है।