मुंबई में साइबर पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए की गई 1.12 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में छह आरोपियों को पकड़ा है। गिरफ्तार किए गए लोगों में एक IIT से पढ़ा हुआ ग्रेजुएट और एक प्राइवेट बैंक में मैनेजर के पद पर काम करने वाला व्यक्ति भी शामिल है। पुलिस की जांच के अनुसार, सभी आरोपी ठगी की रकम को इधर-उधर करने और उससे जुड़े अलग-अलग कामों में भूमिका निभा रहे थे। इनमें अवैध तरीके से पैसे प्राप्त करना, म्यूल अकाउंट संभालना, एक्टिव सिम कार्ड उपलब्ध कराना और बैंक खातों से पैसे निकालना शामिल था।
यह मामला जुलाई-अगस्त के दौरान सामने आया, जब दहिसर में रहने वाले 68 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेशनल को साइबर ठगों ने करीब दो सप्ताह तक अपने जाल में फंसाए रखा। पीड़ित ने बताया कि शुरुआत में उसे एक अनजान व्यक्ति ने फोन किया था। फोन करने वाले ने खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी का अधिकारी बताया और कहा कि उसके आधार कार्ड का इस्तेमाल किया गया है। इसके बाद कॉल को क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर किए जाने की बात कही गई।
कुछ समय बाद विजय खन्ना नाम के व्यक्ति ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर बुजुर्ग से संपर्क किया। उसने दावा किया कि सिम कार्ड के गलत इस्तेमाल को लेकर दिल्ली में उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इतना ही नहीं, आरोपी ने यह भी कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित एक छापेमारी के दौरान पीड़ित के आधार और पैन कार्ड की कॉपी मिली है। इसके बाद बुजुर्ग को डराया गया और सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करने की धमकी दी गई।
दो सप्ताह तक ठगों के निर्देश पर चलता रहा पीड़ित
आरोपियों ने आगे की ठगी के लिए पुलिस के लोगो वाली वॉट्सऐप आईडी का इस्तेमाल किया। इसी आईडी से बुजुर्ग को वीडियो कॉल की गई और उनकी संपत्ति से जुड़ी जानकारी हासिल की गई। इसके बाद उन्हें अपनी FD तोड़कर पैसे देने के लिए कहा गया।
ठगों ने पीड़ित को यह भी चेतावनी दी कि अगर उसने इस मामले की जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को दी, तो उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसके बाद वॉट्सऐप के जरिए कुछ फर्जी दस्तावेज भेजे गए, जिन पर ‘Govt Affairs, Supreme Court of India’ का लेटरहेड लगा हुआ था।
बुजुर्ग पर लगातार निगरानी रखने के लिए उन्हें हर दो घंटे में अपनी लोकेशन साझा करने का निर्देश दिया गया। इसी दौरान दबाव बनाकर उनसे अलग-अलग तरीके से पैसे ट्रांसफर करवाए गए। करीब दो सप्ताह तक यह सिलसिला चलता रहा। बाद में जब पीड़ित की बेटी को पूरी धोखाधड़ी का पता चला, तो विजय खन्ना ने उसे पुलिस में शिकायत करने की चुनौती तक दे दी।
परिवार ने साइबर हेल्पलाइन पर दर्ज कराई शिकायत
बेटी को घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क किया। शिकायत के आधार पर नॉर्थ साइबर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने ठगी गई रकम के ट्रांजैक्शन की कड़ियां जोड़ते हुए जांच शुरू की।
मामले की जांच के लिए DCP बजरंग बनसोडे की निगरानी में टीम बनाई गई। इस टीम में सीनियर इंस्पेक्टर प्रमोद कांबले और इंस्पेक्टर सुनील लोखंडे भी शामिल थे।
गोल्ड ट्रेडिंग फर्म के अकाउंट में पहुंची रकम
जांच के दौरान पुलिस को पैसों के ट्रांसफर से जुड़ी अहम जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, पीड़ित से ठगी गई रकम का बड़ा हिस्सा एक ऐसी फर्म के बैंक अकाउंट में पहुंचा, जो सोने के कारोबार से जुड़ी थी।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस फर्म के दो डायरेक्टर के मोबाइल नंबर बैंक अकाउंट से लिंक थे। जांच में पता चला कि दोनों नंबरों के सिम कार्ड तारिक मोमिन के पास थे। इसके बाद पुलिस ने मोमिन को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस को आशंका है कि तारिक मोमिन ने म्यूल अकाउंट खुलवाने में भी भूमिका निभाई थी।
6 लोगों को पुलिस ने किया गिरफ्तार
जांच के आगे बढ़ने पर गोल्ड ट्रेडिंग फर्म के डायरेक्टर राकेश जैन को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इस मामले में तारिक मोमिन, राकेश जैन, त्यागी, गोहेल और देसाई को पकड़ा है। इनके अलावा इनके एक अन्य साथी अजय शर्मा की भी गिरफ्तारी हुई है।
इस तरह डिजिटल अरेस्ट के जरिए 1.12 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में कुल छह आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

