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मालेगांव में ISLAM पार्टी के मेयर की तैयारी, सपा और AIMIM को बड़ा झटका; महाराष्ट्र में सियासी हलचल

महाराष्ट्र के मालेगांव में नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जिस मालेगांव को लेकर लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने ‘वोट जिहाद’ का आरोप लगाया था, उसी शहर में अब उभरती हुई ISLAM पार्टी ने समाजवादी पार्टी और AIMIM को पीछे छोड़ते हुए बढ़त बना ली है।
पिछले लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में भाजपा को अप्रत्याशित नुकसान उठाना पड़ा था। इसके बाद कोल्हापुर के कनेरी मठ में संत समागम के दौरान फडणवीस ने दावा किया था कि राज्य की 48 लोकसभा सीटों में से कम से कम 14 सीटों पर महायुति को ‘वोट जिहाद’ के कारण हार झेलनी पड़ी। उन्होंने विशेष रूप से मालेगांव सेंट्रल विधानसभा सीट का उल्लेख किया था, जो धुले लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है।
फडणवीस का कहना था कि धुले क्षेत्र की अन्य पांच विधानसभा सीटों पर भाजपा को बढ़त मिली थी, लेकिन मालेगांव सेंट्रल में एकतरफा मतदान के चलते पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। अब उसी मालेगांव में हुए महानगरपालिका चुनाव के नतीजों ने तथाकथित सेक्युलर दलों को भी चौंका दिया है।
नासिक जिले के इस शहर में मुस्लिम आबादी 78 प्रतिशत से अधिक बताई जाती है। इस बार नगर निगम चुनाव में नई बनी ISLAM पार्टी ने 35 सीटें जीतकर सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभार लिया है। उसके साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली समाजवादी पार्टी को पांच सीटें मिलीं, जबकि AIMIM ने 21 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) को 18, भाजपा को सिर्फ दो और कांग्रेस को महज तीन सीटों से संतोष करना पड़ा।
कांग्रेस की तीन में से दो सीटें शहर अध्यक्ष एजाज बेग और उनकी पत्नी ने जीती हैं। कुल मिलाकर नगर निगम की लगभग 75 प्रतिशत सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत हुई है। इस चुनाव में राकांपा का पूरी तरह सफाया हो गया है, जबकि कांग्रेस भी हाशिये पर पहुंचती नजर आ रही है।
गौरतलब है कि ISLAM पार्टी के अध्यक्ष शेख आसिफ 2014 में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। वे शेख रशीद और ताहेरा शेख रशीद के पुत्र हैं, जो 2017 से 2022 के बीच मालेगांव के महापौर रह चुके हैं। पार्टी के गठन के समय शेख आसिफ ने कहा था कि भाजपा को जवाब देने के लिए ISLAM पार्टी बनाई गई है, लेकिन इसके उभार ने भाजपा के साथ-साथ उन दलों को भी झटका दिया है, जिनसे वे पहले जुड़े रहे हैं।
मालेगांव के नतीजों ने हाल ही में आई टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की रिपोर्ट को भी चर्चा में ला दिया है। इस रिपोर्ट में मुंबई में मुस्लिम आबादी के तेजी से बढ़ने के आंकड़े सामने रखे गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक 1961 में मुंबई में मुस्लिम आबादी करीब 8 प्रतिशत थी, जो 2011 में बढ़कर 21 प्रतिशत हो गई और अनुमान है कि 2051 तक यह 30 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। ऐसे में आने वाले वर्षों में यह आबादी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)