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स्कूलों में मराठी अनिवार्यकरण सख्ती से लागू; अनुपालन न करने पर जुर्माने का प्रावधान

Marathi Mandate in Schools Enforced Strictly; Penalties imposed for Non-Compliance

स्कूलों में मराठी अनिवार्य माध्यम के पालन को लेकर सख्त कदम

महाराष्ट्र सरकार ने सभी स्कूलों में मराठी भाषा पढ़ाने के नियम को कड़ाई से लागू करने के लिए नई पहल शुरू की है। चाहे स्कूल किसी भी बोर्ड, माध्यम या प्रबंधन के तहत हो, मराठी अनिवार्य रूप से पढ़ाई जानी चाहिए। इससे जुड़े नियमों का उल्लंघन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके लिए आर्थिक दंड तथा शिक्षा संस्थान की मान्यता रद्द करने का प्रावधान भी किया गया है।

यह क़ानूनी जमीनी कार्रवाई महाराष्ट्र कंपलसरी टीचिंग एंड लर्निंग ऑफ मराठी लैंग्वेज एक्ट, 2020 के तहत, 2020-21 शैक्षणिक सत्र में लागू की गई थी। इसमें कक्षा 1 से 10 तक मराठी पढ़ाना अनिवार्य किया गया। इसके बावजूद कई स्कूलों, विशेषकर अंग्रेजी माध्यम और केंद्रीय बोर्ड से जुड़े स्कूलों में इस नियम का ठीक से पालन नहीं हो रहा था। इस विषय में शिकायतें लगातार आ रही थीं, खासकर मुंबई, ठाणे और पुणे जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों से।

ऐसे में राज्य शिक्षा विभाग ने 13-बिंदुओं वाला एक कठोर प्रवर्तन तंत्र तैयार किया है। इसके तहत शैक्षणिक वर्ष के पहले दो महीनों के दौरान उप निदेशक, शिक्षा निरीक्षक और भाषा विशेषज्ञों की टीम स्कूलों का निरीक्षण करेगी। नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर स्कूल प्रशासन को नोटिस जारी किया जाएगा और 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। गैर-अनुपालन की पुष्टि हो तो ₹1 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा और तत्काल सुधारात्मक आदेश दिए जाएंगे।

प्रशासनिक कार्रवाई के दूसरे स्तर के तौर पर, जिन स्कूलों पर कार्रवाई हुई है, वे शिक्षा निदेशक के समक्ष अपील कर सकते हैं। यदि अपील में भी उल्लंघन साबित होता है तो स्कूल शिक्षा आयुक्त को रिपोर्ट भेजी जाएगी। उसके बाद मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, और तीन माह के भीतर सुनवाई संपन्न होगी। इस प्रकार नियमों के उल्लंघन के लिए एक क्रमबद्ध, प्रभावी और न्याय संगत कार्रवाई प्रणाली स्थापित की गई है।

यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अधिकारियों ने कहा है कि समस्या विशेष रूप से मुंबई, ठाणे और पुणे जैसे शहरों में स्पष्ट दिखी है। कई मामलों में विद्यालयों ने मराठी अध्यापक नियुक्त तक नहीं किए थे, जो विषय की गम्भीरता और जड़ता को दर्शाता है।

राज्य ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सभी प्रकार के स्कूलों पर समान रूप से लागू होता है — चाहे वे राज्य बोर्ड, केंद्रीय बोर्ड, सहायता प्राप्त या असहाय स्कूल हों, या किसी भी माध्यम से संचालित हों। मराठी को राज्य की भाषा के रूप में सभी विद्यालयों में समान रूप से पढ़ाना आवश्यक होगा।

इस पूरे प्रक्रिया को इस तरह डिजाइन किया गया है कि कानूनी चुनौतियों का सामना किया जा सके। निरीक्षण, नोटिस, स्पष्टीकरण का अवसर, अपील और सुनवाई का प्रावधान सुनिश्चित करता है कि कार्रवाई न्याय सम्मत हो। इस तरह प्रशासनिक और कानूनी दोनों पक्षों से मराठी भाषा नियमों के पालन को मजबूती मिलेगी और यह अब केवल एक प्रतीकात्मक आवश्यकता नहीं, बल्कि सख्त निगरानी तथा दंड के साथ लागू होने वाली अनिवार्यता बन गई है।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)