• Sun. Jun 28th, 2026

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए अगले महीने से शुरू होंगे ये कार्य

Report By : ICN Network

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर यात्री सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए अगले महीने से कई महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत की जाएगी। इनमें ब्लिंकर, रंबल स्ट्रिप और गति सीमा के संकेतक बोर्ड लगाना शामिल है। इस पहल को लेकर नोएडा प्राधिकरण ने टेंडर जारी कर दिए हैं।

इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 24 किलोमीटर है, जिसमें से 20 किलोमीटर नोएडा प्राधिकरण के अधीन है। यह एक्सप्रेसवे अक्सर सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनता है, जिसके मद्देनजर सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने की आवश्यकता महसूस की गई है।

इस योजना के तहत, पुराने दिशासूचक बोर्डों को नए तरीके से स्थापित किया जाएगा, जो सोलर पैनल से युक्त होंगे और रात के समय में चमकेंगे। साथ ही, थर्मोप्लास्टिक पेंटिंग, गति सीमा के संकेतक बोर्ड, रंबल स्ट्रिप्स, एएफपी टेप, स्प्रिंग पोस्ट और डेलीनेटर जैसे अन्य सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाएंगे। इन कार्यों के लिए कुल 7.52 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है, और आवेदन की अंतिम तिथि 15 मई तय की गई है।

यह निर्णय उस घटना के बाद लिया गया, जब एक्सप्रेसवे पर एक आईटीएमएस खंभे से टकराकर दो युवकों की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे की सुरक्षा खामियों की पहचान करने के लिए सर्वेक्षण किया और सुधारात्मक उपायों की योजना बनाई।

हालांकि, एक्सप्रेसवे पर सड़क किनारे लगे आईटीएमएस खंभों को स्थानांतरित करना संभव नहीं था, इसलिए इन पर ब्लिंकर लगाने का निर्णय लिया गया है ताकि रात के समय दृश्यता में सुधार हो सके।

इन सुधारात्मक उपायों के माध्यम से, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर यात्रा को और अधिक सुरक्षित बनाने की कोशिश की जा रही है।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

Don't Miss

{“title_results”:[“‘मेरे सवालों पर कथा साहित्य का प्रभाव पड़ा’: कार्लो गिंज़बर्ग (1939-2026), माइक्रोहिस्ट्री के प्रणेता”],”content_results”:[“कार्लो गिंज़बर्ग: माइक्रोहिस्टोरी के क्षेत्र के प्रणेता का निधनइतालवी इतिहासकार कार्लो गिंज़बर्ग, जिन्हें माइक्रोहिस्टोरी के संस्थापकों में से एक माना जाता है, का 17 जून 2026 को निधन हो गया। उनकी उम्र 87 वर्ष थी। गिंज़बर्ग ने इतालवी पुनर्जागरण से लेकर प्रारंभिक आधुनिक यूरोपीय इतिहास तक विभिन्न विषयों में अपना योगदान दिया। उनकी गहन शोध प्रणाली और दृष्टिकोण ने इतिहास लेखन में क्रांतिकारी बदलाव लाए।गिंज़बर्ग की प्रमुख रचनाओं में The Cheese and the Worms: The Cosmos of a Sixteenth Century Miller, The Night Battles, तथा Ecstasies: Deciphering the Witches’ Sabbath शामिल हैं। इन कार्यों ने न केवल इतिहास को नये आयाम दिए, बल्कि कला इतिहास, साहित्य अध्ययन और इतिहासलेखन के सिद्धांतों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।उन्होंने 2010 में बाल्ज़न पुरस्कार प्राप्त किया और 2013 में अमेरिकी फिलॉसफिकल सोसाइटी के अंतरराष्ट्रीय सदस्य के रूप में चुने गए।2019 में कोलकाता में भारतीय प्रकाशक नवीन किशोर के साथ बातचीत के दौरान, गिंज़बर्ग ने अपनी पेशेवर यात्रा, यहूदी धर्म के प्रति अपने “बनने” की प्रक्रिया, विराम चिह्नों के प्रति जुनून और अपनी रचनात्मक सोच पर कथा साहित्य के गहरे प्रभाव के बारे में चर्चा की।उन्होंने कहा, “ऐसे संवाद आमतौर पर बीच में शुरू होते हैं, जिसमें पहले की बातचीत का अनुभव और आगे की चर्चा की उम्मीद जुड़ी होती है। इसलिए मैं सीधे अपने विषय में उतर जाता हूँ।” उनके अनुसार, “एक ऐसे जीवंत परिदृश्य में प्रवेश करना जो पहले किसी ने नहीं देखा, अत्यंत रोमांचकारी होता है। सबसे पहले अपनी जड़ों की खोज करना, फिर इतिहास के जीवन के संकेतों को समझना, और अंततः इतिहासकार बनना एक गहन अनुभव है।”कार्लो गिंज़बर्ग ने माइक्रोहिस्टोरी को एक नई दिशा दी और इतिहास को अधिक मानवीय, सूक्ष्म एवं व्यावहारिक संदर्भों में समझने की विधि पेश की। उनके विचार और शोध आज भी इतिहासकारों एवं विद्वानों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।”]}