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नोएडा: इस साल दर्ज हुए 14 लाख से ज्यादा चालान

सरकार ने यातायात चालान निपटान प्रक्रिया में इसी साल बदलाव करके कोर्ट में जाने से पहले 50 फीसदी चालान का शुल्क भरना अनिवार्य किया है। उम्मीद जताई गई कि इससे लोग सतर्क होंगे, लेकिन असल में उनपर कोई असर नहीं पड़ा। यही कारण है इस साल 14 लाख से अधिक चालान हुए।दरअसल, 20 जनवरी से नए प्रावधानों के तहत अब लोक अदालत में चालान का मामला ले जाने से पहले वाहन मालिक को कुल चालान राशि का 50 फीसदी सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन जमा करना होगा। चालान जारी होने के 45 दिनों के भीतर आधी राशि जमा करने या अपनी आपत्ति दर्ज कराने की समयसीमा भी तय की गई है। इन कड़े नियमों के बावजूद गौतमबुद्धनगर में यातायात नियमों के उल्लंघन पर लगाम नहीं लग रही है। ऐसे में लाखों वाहन मालिकों के सामने अब दो विकल्प हैं, या तो चालान की पूरी राशि का भुगतान करें या लोक अदालत में सुनवाई के लिए आवेदन करने से पहले निर्धारित 50 फीसदी राशि जमा करें।हालांकि ज्यादा चालान होने के कारण ट्रैफिक पुलिस की सतर्कता और चारों ओर लगे कैमरे भी हैं।

पूरे जिले के अधिकतर मार्गों में एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली (आइटीएमएस) के तहत हाई डेफिनिशन एवं एआई आधारित कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, गलत दिशा में वाहन चलाने, रेड लाइट जंप करने और ओवरस्पीडिंग जैसे उल्लंघनों को स्वतः रिकॉर्ड कर चालान जारी करते हैं। इसके चलते चालानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।चलाया जा रहा जागरूकता अभियान : अब तक कई वाहन चालक इस उम्मीद में चालान का भुगतान टालते रहे कि लोक अदालत में चालान की राशि कम या माफ हो जाएगी। हालांकि, सरकार के नए नियमों के बाद यह प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सख्त हो गई है। डीसीपी यातायात अभय कुमार मिश्र ने बताया कि वाहन चालकों को लगातार नए नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )