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‘हवा में आवाजें’: ये हिमालयी लोककथाएँ हमें संयम और सहअस्तित्व के महत्व की याद दिलाती हैं

‘Voices in the Wind’: These Himalayan folktales remind us of the value of moderation and coexistence

‘हवा में आवाजें’: हिमालय की लोककथाएँ संयम और सहअस्तित्व का संदेश देती हैं

हिमालय की प्राचीन लोककहानियाँ आज की भीड़-भाड़ वाली दुनिया में संयम और सहअस्तित्व के महत्व को उजागर करती हैं। ‘Voices in the Wind: Folktales, Folklore and Spirit Stories from the Himalaya’ नामक यह संकलन समय और भौगोलिक सीमाओं को पार करता है, जो आज के अस्थिर वैचारिक परिवेश में आशा की किरण जैसा प्रतीत होता है।

संपादक नमिता गोखले और मालाश्री लाल ने लोककथाओं को एकत्रित किया है, जिनमें लोकप्रिय ही नहीं बल्कि अप्रकाशित, अनेकों भाषाओं की कहानियाँ शामिल हैं जैसे डोगरी, मिजो, भद्रवाही, ड्जोंगखा, लेपचा, भूटिया और लिम्बू। ये कहानियाँ न केवल मनोरंजक हैं बल्कि जीवन के कठोर सत्य को भी बिना सजावट के प्रस्तुत करती हैं। गोखले के अनुसार, ये कहानियाँ बच्चों के लिए जानने और बड़ों के लिए याद करने जैसी हैं, जो जीवन की सच्चाइयों को समझने की क्षमता देती हैं।

सच्चाइयों का प्रतिरूप

संकलन में शामिल एक भीषण बाल्टी लोककथा खेल पोโล के प्रारंभिक उत्पत्ति को दर्शाती है, जिसमें बताया गया है कि कस्बे के राजा गेसर ने कुनलुन पर्वत की लड़ाई में राजा बाकर का वध किया था। इस कहानी के माध्यम से समुदाय की सांस्कृतिक परंपराओं और इतिहास की झलक मिलती है।

यह संग्रह हिमालय की विविध भाषाओं और परंपराओं का अद्भुत संगम है, जो न केवल लोकजीवन को सजीव करता है, बल्कि आधुनिक समाज के लिए भी महत्वपूर्ण सीख प्रदान करता है। इस प्रकार की कहानियाँ नस्ल, भूगोल और समय की सीमाओं से ऊपर उठकर सह-अस्तित्व और सम्मान का संदेश देती हैं।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)