अमेरिका में भारतीय न्यायालय अनुवादक मिनू बत्रा हिरासत में, निर्वासन की आशंका
टेक्सास के हर्लिंगन हवाई अड्डे पर कार्य यात्रा के दौरान गिरफ्तारी, 20 वर्षों से अधिक का अनुवादक अनुभव
संयुक्त राज्य अमेरिका में एक भारतीय महिला, मिनू बत्रा, जिन्हें न्यायालय में हिंदी, पंजाबी और उर्दू भाषाओं के अनुवादक के रूप में जाना जाता है, मार्च 17 को टेक्सास के हर्लिंगन हवाई अड्डे पर हिरासत में ली गईं। उन्हें निर्वासन की प्रक्रिया के तहत रखा गया है।
53 वर्षीया मिनू बत्रा, चार अमेरिकी नागरिक बच्चों की एकल माता हैं। वह मिल्वौकी, विस्कॉन्सिन जाने के लिए एक कार्य यात्रा पर थीं, जब उन्हें हिरासत में लिया गया। उन्होंने अमेरिका में 20 से अधिक वर्षों तक न्यायालय अनुवादक के रूप में कार्य किया है।
मिनू बत्रा भारत में जन्मी हैं और 35 वर्ष पूर्व शरणार्थी के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका में आईं, जब उनके माता-पिता सांप्रदायिक हिंसा में मारे गए थे। उन्हें 2000 में ‘विदडरिंग ऑफ रिमूवल’ की आव्रजन स्थिति प्रदान की गई, जो शरण स्थिति नहीं होती। इस स्थिति के तहत, किसी भी व्यक्ति को स्थायी निवास का आवेदन करने का अधिकार नहीं होता और वे तीसरे देश में भी निर्वासित किए जा सकते हैं।
उनकी वकील ने बताया कि मिनू का आव्रजन दर्जा उन्हें अमेरिकी सीमा के भीतर कानूनी रूप से कार्य करने की अनुमति देता है, बशर्ते वे अमेरिका से बाहर न जाएं या किसी आपराधिक कृत्य में लिप्त न हों। मिनू स्वयं का मानना है कि उनका वर्तमान दर्जा उन्हें अमेरिका में वैध रूप से रहने का अधिकार देता है।
हालांकि, अमेरिकी गृह विभाग ने उन्हें ‘अवैध विदेशी’ बताते हुए कहा है कि उनका रोजगार प्राधिकरण निरस्त है। उक्त प्रतिबंध के चलते मिनू के निर्वासन की संभावना बढ़ गई है।
मिनू बत्रा की गिरफ्तारी ने अप्रवास एवं न्यायालय अनुवादकों के अधिकारों को लेकर चिंता और बहस को जन्म दिया है। भारत एवं अमेरिकी समुदाय के अनेक सदस्य मिनू के पक्ष में आवाज उठा रहे हैं और उचित न्याय की मांग कर रहे हैं।
यह मामला अमेरिकी आव्रजन कानून की जटिलताओं को भी उजागर करता है, जहाँ वर्षों से सेवा देने वाले व्यक्तियों की कानूनी स्थिति अक्सर विवादस्पद बनी रहती है।
स्रोत: CBS News और संबंधित रिपोर्ट्स