जांच में सामने आया है कि हर्षवर्धन ने एनसीआर ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश समेत अन्य जगहों के कारोबारियों को टारगेट किया था। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी इंदिरापुरम की एक प्रिंटिंग प्रेस से फर्जी दस्तावेज तैयार करवाता था। इस मामले में प्रेस संचालक से पूछताछ में सामने आया कि आरोपी उसे जानकारी देकर नंबर प्लेट और कुछ अन्य डॉक्यूमेंट प्रिंट करने के लिए देता था। एक बार प्रिंट होने के बाद उसके साथी कंप्यूटर से डेटा डिलीट करके चले जाते थे। संचालक का कहना है कि वह उसे अधिकारी समझकर ही ऐसा कर रहा था। एएसपी राजकुमार मिश्र ने बताया कि एसटीएफ की तरफ से संबंधित माइक्रोनेशन को पत्र भेजा गया था। इसमें से अभी सिर्फ लास्टलैंड की तरफ से जवाब मिला है। स्वघोषित देश होते हैं माइक्रोनेशन
इस मामले में सेबोरगा, वेस्ट आर्कटिक और लास्टलैंड जैसे माइक्रोनेशन का नाम सामने आया है, जिनसे एसटीएफ ने जानकारी मांगी है। इस मामले के सामने आने के बाद वेस्ट आर्कटिक की तरफ से बयान जारी कर हर्षवर्धन को सभी पदों से हटाने की जानकारी दी गई थी। जानकारी के अनुसार माइक्रोनेशन स्वयं घोषित छोटे समूह होते हैं। इन देशों को किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगठन से मान्यता नहीं दी जाती है। यह एक प्रकार से किसी की निजी जगह भी हो सकती है, जिसे वह देश के रूप में घोषित कर देते हैं।

