नई तकनीक को मौजूदा सिग्नलिंग सिस्टम, जैसे अल्स्टॉम और बॉम्बार्डियर, के साथ तालमेल में काम करना होगा, ताकि मेट्रो संचालन प्रभावित न हो। इच्छुक एजेंसियां 28 मई 2026 तक आवेदन कर सकती हैं। चयनित कंपनियों को एक कोच की लंबाई के बराबर प्लेटफॉर्म पर ट्रायल करना होगा। पूरी प्रक्रिया में डिजाइनिंग के लिए चार महीने और इंस्टॉलेशन व टेस्टिंग के लिए लगभग दो महीने का समय निर्धारित किया गया है। यह पहल यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ देश को मेट्रो तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यात्रियों को मिलेगा सुरक्षा कवच
मेट्रो स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर लगने से यात्रियों की सुरक्षा में बड़ा सुधार होगा। ये दरवाजे ट्रेन आने पर ही खुलेंगे, जिससे ट्रैक पर गिरने, धक्का लगने या हादसों की संभावना काफी कम हो जाएगी। भीड़भाड़ के समय यात्रियों की आवाजाही व्यवस्थित रहेगी, जिससे भगदड़ जैसे हालात नहीं बनेंगे। इसके अलावा ट्रेन संचालन अधिक सटीक और समयबद्ध होगा, जिससे देरी कम होगी। स्वदेशी तकनीक के कारण सिस्टम का रखरखाव भी तेज और सस्ता होगा, जिसका सीधा लाभ बेहतर और भरोसेमंद मेट्रो सेवा के रूप में यात्रियों को मिलेगा

