चार राज्यों में सघन चुनावी मुकाबला, जीत की राह कैसे तय होगी?
नई दिल्ली। तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की मतगणना सोमवार से शुरू हो रही है। परिणाम सार्वजनिक होने तक कई चरणों में मतदान के रुझान सामने आएंगे और दिन के अंत तक अंतिम नतीजे आ जाने की संभावना है।
इन राज्यों में कुल 25 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने हाल ही में अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह चुनाव न केवल राज्यों की राजनीतिक दिशा निर्धारित करेंगे, बल्कि केंद्र एवं राज्य सरकारों की नीतियों के प्रति जनता की प्राथमिकता भी उजागर करेंगे।
पश्चिम बंगाल में मतदान की दर 92.93 प्रतिशत रही, जो एक रिकॉर्ड है। हालांकि, यहां की कुल 294 सीटों में से एक फाल्टा सीट पर पुनः मतदान कराने का निर्णय लिया गया है, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित होंगे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी तृणमूल कांग्रेस के साथ चौथी बार सत्ता में लौटने के लिए जोरसा प्रयासरत हैं, जबकि भाजपा ने मजबूत चुनौती पेश की है। इस चुनाव में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है, खासकर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी सामने आई हैं।
तृणमूल कांग्रेस अपनी लोकप्रिय कल्याण योजनाओं पर भरोसा करती है, वहीं भाजपा प्रशासन की कमियों को मुख्य मुद्दा बनाकर चुनाव मैदान में है। उपलब्ध एग्जिट पोल के अनुसार मुकाबला अत्यंत कड़ा होने का अनुमान है। मामूली मत अंतर राज्य में सत्ता के समीकरणों को बदल सकता है।
तमिलनाडु में 85.1 प्रतिशत मतदान हुआ है, जो यहां के लिए एक उच्च प्रतिशत है। आमतौर पर डीएमके और एआईएडीएमके के बीच मुकाबला होता है, लेकिन इस बार अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कझगम भी चुनावी दंगल में है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाला गठबंधन आगे नजर आ रहा है, जिसके 120 से 145 सीटों तक मिलने का अनुमान है। विजय की पार्टी शहरों में 30 प्रतिशत तक वोट हासिल कर रही है, जो राज्य की पारंपरिक राजनीति में बदलाव ला सकता है।
केरल में मुकाबला बेहद रोचक है जहां पिनराई विजयन की वाम मोर्चा सरकार लगातार तीसरी बार जीतने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ के करीब 72 सीटें जीतने की संभावना है। यदि यूडीएफ अच्छा प्रदर्शन करता है, तो यह राष्ट्रीय राजनीति पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
असम में भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन मजबूती से चुनाव लड़ रहा है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में एनडीए तीसरी बार जीत की ओर अग्रसर है। एग्जिट पोल की रिपोर्ट के अनुसार 126 सीटों में से एनडीए को 85 से 100 सीटें मिलने का अनुमान है। कांग्रेस और सहयोगी मोर्चा बनाने के बावजूद भाजपा की संगठित ताकत एक चुनौती है।
संक्षेप में, देशभर में चुनाव के परिणामों की प्रतीक्षा है। ये परिणाम बतायेंगे कि जनता किन मुद्दों को प्राथमिकता देती है— चकाचौंध वाली विकास योजनाओं को या सुरक्षा, पलायन, रोजगार जैसे समसामयिक विषयों को। इस बार मतपत्रों की गिनती से राजनीतिक क्षेत्र में बड़े बदलाव आने की संभावना पर सभी की नजर टिकी है।