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दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में तीन न्यायमित्र नियुक्त करने का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को सीबीआई की अपील पर सुनवाई करते हुए दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में तीन न्यायमित्र नियुक्त करने का फैसला किया। अदालत ने यह कदम इसलिए उठाया, क्योंकि तीन मुख्य प्रतिवादी अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक मामले की सुनवाई में पेश नहीं हुए। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकलपीठ ने इसी के साथ एक पक्ष को अपना जवाब दाखिल करने का अधिकार भी समाप्त कर दिया और मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार के लिए निर्धारित की।
आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को सार्वजनिक बयान जारी कर न्यायमूर्ति शर्मा की अदालत में व्यक्तिगत रूप से या वकील के माध्यम से पेश होने से इनकार कर दिया था। केजरीवाल ने कहा कि न्यायाधीश से न्याय मिलने की उनकी उम्मीद टूट गई है। उन्होंने अपने फैसले को महात्मा गांधी के सत्याग्रह से प्रेरित बताया और कहा कि यह उनके विवेक द्वारा निर्देशित है। इससे पहले उच्च न्यायालय ने केजरीवाल की न्यायमूर्ति शर्मा के रिक्यूसल की याचिका खारिज कर दी थी।

अदालत ने कहा कि रिक्यूसल की मांग अनुमान और कयासों पर आधारित है, जो कानूनी रूप से पर्याप्त नहीं है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल धारणा या संभावित प्रतिकूल फैसले के आधार पर न्यायाधीश से रिक्यूसल नहीं मांगा जा सकता। यह मामला दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 से जुड़ा है। सीबीआई ने निचली अदालत द्वारा अरविंद केजरीवाल समेत अन्य आरोपियों को दिए गए डिस्चार्ज आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। अदालत तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को न्यायमित्र के तौर पर नामित करेगी। शुक्रवार को तीनों न्यायमित्रों की नियुक्ति की जाएगी

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )