नीट यूजी परीक्षा रद्दीकरण: छात्र संगठनों की न्याय व पारदर्शिता की मांग तीव्र
नई दिल्ली। देशभर में 3 मई को आयोजित की गई नीट यूजी परीक्षा अनियमितताओं के चलते रद्द कर दी गई है। इस विवाद के बाद छात्र संगठनों ने परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाते हुए न्याय और जवाबदेही की मांग तेज कर दी है।
लाखों छात्र जिन्होंने वर्षभर अथक प्रयास किए, अब इस अप्रत्याशित निराशा से जूझ रहे हैं। छात्र संगठन एनएसयूआई और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने परीक्षाप्रणाली में गड़बड़ी और पेपर लीक की घटनाओं को गंभीर समस्या बताया है, जो छात्रों के मनोबल और भविष्य के लिए खतरा हैं। वे चाहते हैं कि दोषियों के खिलाफ कड़े अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएं और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की जवाबदेही तय हो।
एनएसयूआई ने केंद्र सरकार से एनटीए को बंद करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है, साथ ही परीक्षा लीक मामले की स्वतंत्र जांच कराने की बात कही है। एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि बड़ी गड़बड़ी हुई है, फिर भी कुछ मुख्य पहलुओं पर सरकार चुप्पी साधे हुए है, जैसे कि पेपर लीक में शामिल बड़े नेटवर्क का खुलासा अभी बाकी है।
दूसरी ओर, अभाविप ने इन अनियमितताओं को ‘‘वर्षभर की मेहनत के साथ अन्याय’’ करार देते हुए कहा है कि परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को संरक्षित रखना अनिवार्य है। उन्होंने केंद्र सरकार से निष्पक्ष और शीघ्र जांच की मांग की है ताकि परीक्षा में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
वीरेंद्र सोलंकी, अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री, का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं छात्रों के भविष्य पर गहरा प्रभाव डालती हैं, इसलिए तकनीकी सुरक्षा, प्रश्नपत्र गोपनीयता, परीक्षा केंद्रों की प्रभावी निगरानी और जवाबदेही के उपाय तत्काल मजबूत किए जाने चाहिए। अभाविप लगातार इस दिशा में सरकार से कदम उठाने की मांग करती रही हैं ताकि आने वाले समय में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
छात्र संगठन इस पूरे विवाद के दौरान परीक्षार्थियों और अभिभावकों के प्रति पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने की भी सरकार से मांग कर रहे हैं ताकि उन्हे सही तथ्यों से अवगत कराया जा सके और भविष्य में शिक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी नियंत्रण हो सके।