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दिल्ली शराब केस से अलग हुईं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा, लेकिन केजरीवाल-सिसोदिया समेत 6 AAP नेताओं पर अवमानना की कार्रवाई

दिल्‍ली शराब केस से अलग हुईं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा, लेकिन केजरीवाल-सिसोदिया समेत 6 AAP नेताओं पर अवमानना की कार्रवाई
दिल्ली आबकारी घोटाला केस में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा का अलग होना और अवमानना कार्यवाही की घोषणा

नई दिल्ली: दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में एक बड़ा मोड़ आया है, जब दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इसके साथ ही अदालत ने आम आदमी पार्टी के छह नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी है।

अदालत की प्रतिक्रिया और आदेश

न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा है कि किसी भी न्यायिक आदेश की निष्पक्ष आलोचना नागरिक का अधिकार है, लेकिन सुनियोजित और अपमानजनक अभियानों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि न्यायपालिका पर राजनीतिक दबाव या सोशल मीडिया अभियान न्यायिक स्वतंत्रता के लिए खतरनाक हैं। न्यायमूर्ति ने इन नेताओं के व्यवहार को गंभीर माना और अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कार्यों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की घोषणा की।

न्यायमूर्ति शर्मा का सुनवाई से अलग होना

स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि इस परिस्थिति में वे अपने आप को मामले से अलग कर रही हैं ताकि न्यायालय की प्रक्रियाओं पर कोई दबाव या अभद्र प्रभाव न पड़े। उन्होंने इस निर्णय को संवैधानिक साहस का उदाहरण बताया और बताया कि न्यायपालिका की छवि को दुष्प्रचार से बचाना आवश्यक है।

सोशल मीडिया पर निगरानी और व्यापक जांच

अदालत ने निर्देश दिए हैं कि सोशल मीडिया पर न्यायमूर्ति के खिलाफ अपमानजनक और भ्रामक प्रचार करने वालों की सूची तैयार की जाए। इसमें केवल AAP नेताओं तक सीमित नहीं बल्कि उन सभी व्यक्तियों को भी शामिल किया जाएगा जिन्होंने इस कार्रवाई में भाग लिया। यह कदम डिजिटल माध्यमों पर न्यायपालिका के खिलाफ हो रहे प्रभाव का मुकाबला करने के लिए उठाया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद 27 फरवरी को शुरू हुआ था, जब ट्रायल कोर्ट ने मुख्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। CBI ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति शर्मा की पीठ ने ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियों को गलत बताया, जिससे मामले में राजनीतिक और कानूनी विवाद गहराया। इसके बाद विभिन्न नेताओं ने न्यायपालिका पर आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

आगे का रास्ता

अदालत ने इस मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करने और एक नई पीठ के समक्ष सुनवाई कराने के निर्देश दिए हैं। सामाजिक और राजनीतिक दबाव के बीच न्यायपालिका की स्वतंत्रता और स्वतंत्र न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)