मुंबई हाईकोर्ट ने नरेंदर दाभोलकर हत्या मामले में शरद कालस्कर को दी जमानत
बॉम्बे हाईकोर्ट ने तर्कवादी नरेंदर दाभोलकर की हत्या के दोषी शरद कालस्कर को उनकी आजीवन कारावास की सजा को अपील के निपटारे तक स्थगित करते हुए जमानत मंजूर की है। यह निर्णय न्यायालय ने उनके द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान लिया।
कालस्कर को पुणे की सत्र अदालत ने 2024 में सह-आरोपी सचिन अंडूरे के साथ दाभोलकर की 2013 में हुई निर्मम हत्या के लिए दोषी ठहराया था। दाभोलकर को पुणे में गोली मार दी गई थी। इस फैसले के बाद से कालस्कर जीवन भर की सजा काट रहे थे, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कालस्कर की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए अभियोजन पक्ष के मामले में गम्भीर आशंकाएं जताईं। न्यायालय ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में प्राथमिक रूप से असंगतियां पाईं और कालस्कर को अपराध से जोड़ने वाली पहचान प्रक्रिया पर शक व्यक्त किया।
न्यायाधीशों ने यह भी उल्लेख किया कि उचित पहचान प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं हुआ है और कालस्कर की हमलावरों में से एक के रूप में भूमिका को लेकर संदेह बरकरार हैं। इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अपील के निपटारे तक जमानत देने का निर्णय लिया।
अभियोजन पक्ष ने इस याचिका का विरोध किया और जमानत आदेश पर रोक लगाने का आग्रह भी किया, लेकिन अदालत ने इसे ठुकरा दिया।
अतः हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय तक शरद कालस्कर जमानत पर रहेंगे।
संदर्भ: नरेंदर दाभोलकर की हत्या ने समाज में धार्मिक और तर्कवादी विचारधाराओं के बीच तीव्र बहस छेड़ी थी। इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया लगातार विवादों के बीच चल रही है।
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