एमसीडी ने अपने स्कूलों के विद्यार्थियों के जीवन में बचपन से योग को हिस्सा बनाने का निर्णय लिया है। वह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक स्कूल में बच्चों को योग खिलाने के लिए योग गुरु नियुक्त करेगी। स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने हाल ही में बजट पेश करते हुए इस योजना का ऐलान किया है।
सत्या शर्मा ने स्कूलों में योग सिखाने के निर्णय के पीछे तर्क दिया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर पूरी दुनिया ने योग को अपनाया है। प्रधानमंत्री सदैव मानते है कि शिक्षा तभी पूरी होती है जब उसके साथ शरीर, मन और चरित्र का संतुलित विकास हो। इसी दृष्टिकोण के तहत प्रधानमंत्री ने देश में योग और खेलों को नई पीढ़ी के जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का काम किया है। इसके मद्देनजर एमसीडी ने अपने स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बचपन में योग से जोड़ने का निर्णय लिया है।
एमसीडी के इस निर्णय के तहत बच्चों को नियमित रूप से योग सिखाया जाएगा। वह योग सिखाने वाली संस्थाओं से संपर्क करेगी और उसने स्कूलों के लिए योग गुरु उपलब्ध कराने का आग्रह करेगी। एमसीडी का कहना है कि योग के अभ्यास से बच्चों का शारीरिक स्वास्थ्य मजबूत होगा, मानसिक संतुलन और एकाग्रता बढ़ेगी और आत्मनियंत्रण के गुण विकसित होंगे। इससे बच्चे तनावमुक्त रहकर पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। इसके साथ ही बच्चों में योग के माध्यम से अनुशासन, टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास का विकास होगा।
दूसरी ओर, एमसीडी अपने स्कूलों में खेल मैदानों का बेहतर उपयोग किया जाएगा और विभिन्न खेल फेडरेशन के प्रशिक्षकों को आमंत्रित कर बच्चों को व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस तरह से खेल और योग दोनों ही बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनेंगे। एमसीडी अपने इस कदम से उम्मीद कर रही है कि स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बेहतर होगा और बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। इस योजना से विद्यार्थी स्वस्थ, संतुलित और सशक्त नागरिक बनकर समाज में योगदान देने में सक्षम होंगे।