असाम की रैखिक पंखों वाली बत्तख: अंतर्व्याप्त और अनजानी
असम का राज्य पक्षी, सफेद पंखों वाली बत्तख (Asarcornis scutulata) अपनी रहस्यमय उपस्थिति और दुर्लभता के लिए प्रसिद्ध है। दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के वनस्पतिपूर्ण दलदली इलाकों में पाई जाने वाली यह प्रजाति अब संकटग्रस्त है, जिसके संरक्षण की दिशा में व्यापक प्रयास आवश्यक हैं।
आमतौर पर शांत स्वभाव वाली यह बत्तख दिन में दुर्लभ रूप से देखा जाती है, जबकि शाम के समय इनके स्वर पूरे जंगल में गूंजते हैं, जिन्हीं आवाजों के कारण इसे असमी भाषा में ‘देव हंस’ कहा जाता है। इसकी उड़ान में सफेद रंग के विशाल पंख, जिनका विस्तार लगभग 153 सेंटीमीटर (5 फीट) तक होता है, ही इसकी पहचान हैं।
अस्थिर पारिस्थितिकी तंत्र और अज्ञात प्रजनन एवं आहार वृत्तांत की कमी इस प्राणी के संरक्षण में सबसे बड़ी चुनौती है। वन्य जीव ट्रस्ट ऑफ इंडिया के जीवविज्ञानी आफ्ताब अहमद के अनुसार, “हमें इनके आहार, प्रजनन पैटर्न और वनों में उनके बत्तकली के जीवन अपेक्षाओं के बारे में अभी तक सीमित और असंगठित जानकारी ही प्राप्त है। इनका पता लगाना और अनुसंधान करना काफी कठिन है।”
इस दुर्मिळ प्रजाति की स्थिति का अध्ययन करने और संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने हेतु वैज्ञानिक एवं संरक्षण संस्थाओं को तत्पर रहना होगा। पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों का संयोजन कर इनके आवास स्थानों की रक्षा करना और समुदाय के साथ जागरूकता बढ़ाना अनिवार्य है।
सफेद पंख वाले बत्तख का अस्तित्व केवल जैव विविधता में एक अनमोल रत्न ही नहीं, बल्कि समग्र पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन की कुंजी है। इनकी रक्षा हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
घरों और बाहरी परिवेशों में रहने वाले कबूतरों और अन्य पक्षियों की उपस्थिति को नजरअंदाज करते हुए, यह बत्तख संभावित साथी को आकर्षित करने के लिए अपने सिर को हिलाता है और अनोखी आवाज़ करता है, जो एक आइसक्रीम ट्रक के हॉर्न जैसी लगती है।
मादा पक्षी अपनी उदासीनता दर्शाती है, लेकिन पूरी तरह से अस्वीकार नहीं करती। यह संकेत इस नर पक्षी को अपने प्रेम आचरण को जारी रखने के लिए प्रेरित करता है। जल्द ही, मादा भी सिर हिलाकर जवाब देती है और अपनी आवाज़ें निकालती है।