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दिल्ली चुनाव में प्रचार पर कांग्रेस ने भाजपा से ज्यादा किया खर्च

ByAnkshree

Dec 18, 2025

दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पार्टी प्रचार और सोशल मीडिया अभियानों पर भाजपा से अधिक खर्च किया, हालांकि उम्मीदवारों पर खर्च के मामले में वह पीछे रही। यह जानकारी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की उस रिपोर्ट में सामने आई है, जिसमें चुनाव आयोग को सौंपे गए राजनीतिक दलों के व्यय और चंदा विवरणों का विश्लेषण किया गया है।

एडीआर के अनुसार, चुनाव में भाजपा का कुल खर्च 57.65 करोड़ रुपये रहा, जो कांग्रेस के 46.19 करोड़ रुपये से अधिक है। पार्टी प्रचार पर कांग्रेस ने 40.13 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि भाजपा का यह खर्च 39.14 करोड़ रुपये रहा। आम आदमी पार्टी (आप) ने पार्टी प्रचार पर 12.12 करोड़ रुपये खर्च किए। सोशल मीडिया अभियानों में कांग्रेस का खर्च 5.95 करोड़ रुपये रहा, जो भाजपा के 5.26 लाख रुपये से कहीं अधिक है। आप ने सोशल मीडिया पर लगभग 3 करोड़ रुपये खर्च किए। वहीं, उम्मीदवारों पर खर्च के मामले में आप ने 2.4 करोड़ रुपये और अन्य दलों की तुलना में अपेक्षाकृत कम राशि घोषित की। 

चंदा जुटाने के मामले में भाजपा आगे रही
कुल 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा के चुनाव में भाजपा ने 48 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि आप को 22 सीटें मिलीं। कांग्रेस इस चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी। चंदा जुटाने के मामले में भी भाजपा आगे रही। भाजपा ने 88.7 करोड़ रुपये का चंदा जुटाया, जबकि कांग्रेस ने 64.3 करोड़ रुपये और आप ने 16.1 करोड़ रुपये एकत्र किए। एडीआर के मुताबिक, अब तक नौ दलों ने अपने खर्च का विवरण दिया है, जिनका कुल खर्च 120.3 करोड़ रुपये रहा। इसमें 27 करोड़ रुपये उम्मीदवारों पर खर्च हुए। भाजपा, कांग्रेस और आप के अलावा केवल बसपा ही ऐसी पार्टी रही, जिसने एक करोड़ रुपये से अधिक (1.8 करोड़ रुपये) खर्च किए।

चंदा संग्रह का सबसे पसंदीदा तरीका चेक या डीडी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुल 170.68 करोड़ रुपये का चंदा मुख्य रूप से दलों के केंद्रीय मुख्यालय स्तर पर जुटाया गया। चंदा संग्रह का सबसे पसंदीदा तरीका चेक या डीडी रहा, जिससे 74 प्रतिशत से अधिक राशि आई, जबकि करीब 26 प्रतिशत चंदा नकद के रूप में प्राप्त हुआ। खर्च के मामले में नकद का उपयोग बेहद कम रहा और कुल खर्च का केवल 0.04 प्रतिशत, यानी 3.7 लाख रुपये नकद खर्च किए गए। एआईएमआईएम, जिसने दो सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकी, ने अपने हलफनामे में कोई खर्च नहीं दिखाया। एडीआर के अनुसार, 2020 और 2025 दोनों चुनाव लड़ने वाले छह दलों के कुल खर्च में इस बार करीब 39 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )