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फतेहपुर में नीलगाय से टकराकर पलटी कार एक ही परिवार के मासूम सहित 8 घायल

Report By : Umesh Chandra Fatehpur (UP)

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में दो अलग अलग थाना क्षेत्र में सड़क हादसे हो गए जिसमें नील गाय टकराकर कार पलट गई और सड़क पर पड़ी गिट्टी से फिसलकर बाइक सवार सड़क पर गिरकर घायल हो गए। सड़क हादसे में 11 लोग घायल हो गए,जहां 9 लोगों की हालत गंभीर देखकर डॉक्टर ने कानपुर मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। दो घायलों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।

घटना स्थल में बिलखते मासूम बच्चों को देखकर राहगीरों ने बुलाई एम्बुलेंस

जिले के हुसैनगंज थाना क्षेत्र के सात मील चौराहा से पहले बीते मंगलवार की रात करीब 12 बजे के आस आस लखनऊ की ओर से आ रही तेज रफ्तार कार नील गाय से टकराकर कई पलटी खाकर पलट जाने से कार में सवार बच्चे बुजुर्ग सहित 8 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।राहगीरों ने देखा तो मामले पर पुलिस को जानकारी देकर घायलों को कार से बाहर निकाला मासूम बच्चों सहित 6 लोगों के सिर में गंभीर चोंटे आ गईं सूचना पर पहुची पुलिस ने सभी को 108 एम्बुलेंस के मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

शादी समारोह में शामिल होने जा रहा परिवार हादसे का शिकार

हादसे में रविन्द्र कुमार जिनकी पत्नी सीमा लखनऊ में ड्यूटी करती है।रविन्द्र बहन के शादी में शामिल होने लखनऊ से बाँदा जिले के मटोंघ के पास लोहरा गांव जा रहा थे।कार में 10 साल का बेटा डोलू और राज 15 वर्ष,साधना 34 वर्ष,समर 12 वर्ष,यशिका 4 वर्ष,अरविंद सिंह 35 वर्ष की हालत गंभीर देखकर डॉक्टर ने सभी को कानपुर मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया।

टूटी रोड होने से हुवा हादसा बाइक सवार तीन लोग रोड में गिरे

दूसरा हादसा हथगाम थाना क्षेत्र के रहमत हसऊपुर गांव के पास सड़क जर्जर होने से गिट्टी में बाइक फिसल जाने के कारण बाइक गिरने से मनोज,संदीप और बलवान गंभीर रूप से घायल हो गए।सूचना पर पहुची पुलिस ने तीनों घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया।जहां पर मनोज की हालत गंभीर देखकर डॉक्टर ने कानपुर मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया।

रोड सेफ्टी और खराब रोड के कारण हुवे दोनों हादसे

जिले के दो थाना क्षेत्र में हुए दो अलग अलग सड़क हादसे में 11 लोग घायल हुए थे जिसमें 9 लोगों की हालत गंभीर देखकर डॉक्टर ने कानपुर मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया है। वंही घायल 24 वर्षीय युवती ने बताया कि लखनऊ से वह लोग कार से मटौंघ जा रहे थे तभी रोड में सेफ्टी तार न लगे होने की वजह से यह हादसा हो गया।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}